Tuesday, 9 September 2014

चलो कहानी सुने



मौत और जवान
यह एक रूसी जवान की कहानी है, जो रिटायर होने के बाद , अपने गाँव में आकर रहा था. अकेला था इसलिए थोड़ा बहुत काम करता और आराम फरमाता रहता. एक रात जब  वह सो रहा था अपने सर के पास उसे एक काली सी छाया दिखाई दी, उसके बड़े बड़े दांत थे, बड़े बड़े नाखून, चेहरा किसी नकाब में छुपा रखा था पर था बड़ा डरावना. जवान ने डरते डरते पूछा भाई तुम हो कौन और यहाँ क्या कर रहे हो.उसने अपनी घरघराती, अस्पष्ट सी आवाज में कहा, “मैं मौत हूँ”, यहाँ मैं तुम्हें अपने साथ लेने आया हूँ.” सुनते ही जवान के होश उड़ गए, “ क्या, अभी तो मैं हट्टा-कठ्ठा हूँ, और जिन्दगी में मैने कुछ देखा भी नहीं है.अभी तक तो मैं बस सीमा पर था. ये क्या तरीका है.” डरते हुए जवान ने कहा. यह सुन मौत ने कहा. “कोई बात नहीं तुमको मैं दो दिन देता हूँ अपने काम पूरे कर लो.” अभी तुम्हारे पास दो दिन है. इतना कह कर मौत चली गयी.
बेचारा जवान तो परेशान हो गया.  अब उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. खाना पीना सब बेकार लगने लगा, बस दो दिन हैं. मैं क्या इच्छा पूरी करूं. उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. फिर अचानक उसके मन में कुछ आया वह मुस्कुराया और चादर खींच कर सो गया. 

दो दिन बाद फिर से मौत उसके सर के पास आ कर बैठ गयी. जवान ने कहा देखो तुमने मुझे अपना काम पूरा करने का मौक़ा दिया था, मैंने बहुत कोशिश की पर मेरा एक काम थोड़ा सा बाकी रह गया गया है, मुझे एक दिन की और मोहलत दे दो.” मौत ने थोड़ी देर तक सोच विचार किया कुछ गुणा-भाग किया और फिर उस जवान से कहा,” ठीक है ठीक है चलो मैं कल आता हूँ, और मैं ये तुम्हारे दरवाजे पर लिख कर जाता हूँ”. और फिर मौत ने जवान के दरवाजे पर बड़े बड़े अक्षर में लिखा, ” कल मैं तुम्हें ले कर जाऊँगा”. और जवान को कहा “देखो, कल शाम मैं तुम्हें ले जाऊँगा”. जवान ने कहा, “ठीक है.” मौत चली गयी और जवान खाना खा कर चादर तान कर सो गया. 

आज का दिन निकल गया. दूसरा दिन आया, फिर शाम आई. शाम आते ही मौत सवार हो गई सर पर. चलो अब तुम्हारा समय खत्म हुआ. जवान ने कहा, क्यों डराते हो, अपने वाडे से मत मुकारो.” मौत ने कहा,”मैं कहाँ मुकर रहीं हूँ, मैंने कहा था कल आऊँगी.” जवान ने कहा,” वही तो तुमने कहा था कल आयोगी, और आज आ गयी देखो तुमने ही लिखा है, कल आऊँगी” मौत को कुछ समझ में नहीं आया, हाँ सच में मैंने तो कल आने की बात कही थी,  फिर ये क्या हुआ. सोचते सोचते मौत वापस चली गयी. दूसरी शाम को फिर मौत आई, जवान ने फिर कहा, “फिर आ गई, अरे तुम्हें कल आना था” मौत परेशान हो गयी, हाँ ये तो कल ही लिखा है. वह फिर वापस गयी. तीसरे दिन जब मौत आई तो वह थोड़ी नाराज थी उसे भी तो जवाब देना पड़ता होगा. इस बार जवान के यह कहने पर वह वापस तो हो गई पर जाते जाते दरवाजे पर लिखा सन्देश मिटा दिया.
जवान समझ गया अब कुछ और सोचना पडेगा. वह तैयारी करने लगा. दूसरे शाम को जब मौत आयी तो उसने जवान को एक बोरे के अन्दर देख किसी को डांटते सूना. वह कह रहा था,” तुम ताकतवर नहीं हो मौत अधिक ताकतवार है.”  मौत ने कहा, ‘आज कोई चालाकी नहीं चलेगी, तुम्हें मेरे साथ चलना ही होगा.” जवान ने कहा मैंने कब मना किया है, पर इस बोरे के अन्दर जो बैठा वह कह रहा है “यह मुझे तुमसे बचा लेगा क्योंकि वह तुमसे अधिक ताकतवर है. मैं उसे समझा रहा हूँ पर वह बार बार कह रहा है, तुम बहुत डरपोक हो.” यह सुन मौत को आया गुस्सा. उसने चीख कर कहा,” कौन है वह, बाहर निकालो.” इस पर जवान ने कहा, “वह बाहर नहीं आयेगा, बार बार कह रहा ही तुम तो डर से अन्दर जाओगे नहीं.” मौत को आया गुस्सा और वह घुस गई बोरे के अन्दर. जैसे ही मौत गई अन्दर जवान से कास के बोरे का मुंह बाँध दिया और दौड़ता हुआ उसे समुद्र में फेक आया और घर आ कर बड़े मजे से सो गया. 

इधर बेचारी मौत समुद्र की लहरों में थापदे खाती रही, बहुत साल बाद अचानक बोरे का मुंह खुल गया. गिरते पड़ते मौत बाहर आई. गुस्से से कांप रही थी मौत. “सबसे पहले मुझे उस जवान को ढूँढना है,” यह सोच कर वाज जवान के घर की और चल पडी. काफी ढूँढने पर जवान मिल गया पर अब वह जवान कहाँ था, वह तो पोते-पोतियों के साथ खेल रहा था अच्छा खासा खेत था उसके पास, बड़ा सा ख़ूबसूरत सा घर भी बना रखा था. मौत को देखते ही जवान ने कहा, “ माफ़ करना, पर अब मैं तुम्हें तंग नहीं करूंगा. चलो तुम्हारे साथ चलता हूँ. जिन्दगी के सारे रेंग देख लिए मैंने”

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