Sunday, 28 September 2014

मकडी की बातों का जाल



मक्खी को मकड़े का आमंत्रण 

धूर्त मकडी ने छलकाया मकडी पर प्यार
अपनापन दिखाने के लिए मैं कैसे करूं आपका सत्कार
अपने दर पर लगाया मैंने आपकी पसंद की चीजों  के भडार
उसे स्वीकार कर आप मुझ पर कर दें उपकार

अरे नहीं, नहीं मुझसे छुपा नहीं आपका यह श्रृंगार
इस मोह में पड़ना नहीं चाहता मैं एक भी बार

न कोई तुम सा सुन्दर, न कोई तुम सा समझदार, चमकती आँखें सुनहरे पर
 आईना तरसता तुम्हें खुद में उतारने,  मेरे घर पर
 आ जाओ एक बार, न भूलेगा यह अहसान वह जिन्दगी भर

जो कुछ भी आपने कहा उसका बहुत बहुत आभार
अभी चलता हूँ मैं,  फिर कभी सुनूंगा ये उदगार

अपने माँद में चली गई मकडी इन सारी बातों के बाद
वापस आयेगी यह मक्खी इसका था उसे पूरा विशवास
प्यारा सा छोटा सा एक जाला किया तैयार इस बार  
बिछा दस्र्तरखान किया खुद को नए दावत के लिए तैयार

मकड़े के दरवाजे पर गूंजा एक मधुर संगीत
सुन जिसे बाबरी मक्खी बन गयी उसकी मीत

अपने सुन्दर आँखों, पंखों के समेटे पहुच गयी वह उसके घर
हाय! बेचारी मक्खी उलझी उस सुन्दर बिस्तर पर
सीढी में उलझी, पार्लर में पहुची बस आ न सकी वह फिर अपने घर

मेरी होविट की कविता के अनूदित अंश  

Friday, 26 September 2014

मक्खी को मकड़े का आमंत्रण



मकडी और मक्खी की वार्ता

क्या आप मेरे पार्लर में आयेंगी? मकडी ने एक उड़ती हुई मक्खी से पूछा
मनमोहक अचम्भित करने वाला, चौंका वाली चीजों से भरा हुआ है यह छोटा सा आरामघर
आ जाओ ये मुलायम चमकदार सीढीयाँ पहुचायेंगी आपको उस तक

ओह नहीं, नहीं इतनी व्यग्रता के साथ मुझे ऐसा आमन्त्रण न दो
मैंने सुना है अजूबों से भरा है तेरा यह पार्लर,
वापस नहीं आ पाता वह जो पहुंच जाता है उस तक.

मुझे पता है इन ऊंचाईयों को छूते छूते थक गए होंगे तेरे पर
आ, आकर लेट ले मेरे इस मुलायम छोटे बिस्तर पर
सुन्दर से पर्दों से घेर कर फैलाए हैं मुलायम से चादर उस पर
आओ सो जाओ इस पर तुम छुप कर

नहीं नहीं ऐसा मत करना,  ऐसा है मेरे बड़ों का कहना
इस के पास जाने वाले उठ नहीं पाते कुछ भी कर


मेरी होविट की कविता के अनूदित  अंश  

Thursday, 11 September 2014

सुपर मैटेरियल: स्पाइडर सिल्क



मकड़े का सिल्क:  एक करिश्मा

फिल्म  स्पाइडर मैन-2 के एक दृश्य में स्पाइडर मैन ने अपने स्पाइडर के सहारे लोंगो से भरी ट्रेन को गिरने से बचाता है. इसमें उसने आधे इंच से भी पतले 10 जोड़े स्पाइडर सिल्क के धागे का इस्तेमाल किया था.  स्पाइडर मैन की सारी ताकत उसके धागों की मजबूती और लचीलापन है. कितने मजबूत नजर आते हैं ये धागे. पर ऐसा मत सोचिये कि यह सिर्फ एक कल्पना है. अगर आप इस क्षेत्र में काम रहे में जीव विज्ञान और इंजीनीयरिंग से जुड़े वैज्ञानिक का मंतव्य जानेगें तो मुझे पूरा विशवास है आप भी संजीदा हो जायेंगे. उताह यूनिवर्सिटी के जीवविज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफ़ेसर रैंडी लेविस को यह दृश्य सत्यता के काफी करीब लगा. उन्होंने इस दृश्य में इस्तेमाल किये जाने वाले धोगों की मजबूती के साथ उन धागों की संख्या जानने की कोशिश की जो दीवाल से चिपके थे. इतना ही नहीं ट्रेन का उसके यात्री सहित भार और ट्रेन की गति पता करने की भी आवश्यकता महसूस किया. लेविस के अनुसार स्पाइडर मैन अपने धागों की सहायता से ट्रेन रोक सकता है. लेविस पिछले 25 साल से  स्पाइडर सिल्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जी हाँ अब जल्दी ही हम एक नए सुपर मैटेरियल (सुपर सामग्री) का इस्तेमाल करने वाले हैं. और यह सुपर मैटेरियल तैयार होगा मकडी के द्वारा तैयार किये गए धागों से . वही मकडी और वही धागे जिसे घर के किसी कोने में देखते ही हम झाडन उठा दौड़ पड़ते हैं उसे उस जगह से हटाने. वही धागा और जाल जो अगर आपके दीवाल पर नजर आयेगा तो आपको गन्दगी नजरअंदाज करने वाला और लापरवाह समझा जाएगा. जी हाँ यह धागा स्टील से पांच गुना मजबूत और कलवार से तीन गुना कडा होता है. इतना ही नहीं स्वभाव से प्रोटीन होने के बावजूद यह सड़ता गलता नहीं है साथ ही यह जीवाणुनाशक भी होता है. काफी लचीला और मजबूत होने के साथ इतने सारे गुण,  प्रकृति के इस वरदान का इस्तेमाल हम नहीं कर पायें ऐसा कैसे हो सकता इसलिए वैज्ञानिक इस धागे को बाजार में लाने की कोशिश में लग गए. इस  धागे से बनी रस्सियाँ, कपडे, यहाँ तक कि पतले पतले रेशे से बहुत तरह की चीजें तैयार कर सकते हैं. पहली चीजें जो ध्यान में आती हैं वह हैं, बुलेटप्रूफ पोशाक, पेराशूट, एयरबैग और केबुल. लेकिन वैज्ञानिक खुद की चाह को इसकी मजबूती और लचीलेपन तक सीमित रखना नहीं चाहते. उनकी चाहत में इस धागे की जीवाणुनाशक प्रवृति भी आकर्षित करती है. हमारा शरीर भी इस धागे को स्वीकार करता है, तो हमारी चाहत तो बढ़ेगी ही. घाव को भरने या सिलने के लिए, कृत्रिम टेंडन बनाने में और न जाने कहाँ कहाँ हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन हमारी चाहत यहीं तक सीमित नहीं रहती इस धागे की और ताम्बे की थर्मल चालकता लगभग एक सामान है. लेकिन इसका घनत्व ताम्बे के घनत्व से 7 गुना कम है. इसका मतलब हुआ कि यह एक ऐसा पदार्थ है जो बहुत कुशलता के साथ ताप का प्रबंधन (heat management) कर सकता है. एक में दस के गुण, इसे बाजार में लाने की सख्त जरूरत है.
पर इस अनूठे से इतने गुणों से सुस्जित कुदरत के करिश्मे को अपना बना पाना आसान नजर नहीं आ रहा. यह मकडी जैसे घरों में फ़टाफ़ट जाला लगा कर हमें परेशान करती है वैसे ही यह हमें इरादे में कामयाब न होने दे कर चिढा रही है.  एक तो यह एक बार में बहुत सारे धागे नहीं बनाती दूसरा जितना बनाती है मकसद पूरा होने के बाद उसे खा जाती है. सिल्क वर्म को तो हमने काबू में कर किया है, वह हमारी मर्जी पूरी कर देते हैं, पर इन मकड़ियों को पालना भी संभव नहीं हुआ. चलो कोई बात नहीं धागे का स्वभाव हमें पता है, यह एक प्रोटीन ही तो है, कुछ और कोशिश करते हैं. कोशिश नहीं बहुत सारी कोशिश हुई और हो रही इस मूल्यवान धागे को बनाने की, पर वहां भी मुंह की खाई हमने.  एक उदाहरण लेते हैं, वायोमिंग विश्वविद्यालय (wyoming university) के जीववैज्ञानिकों ने सिल्क बनाने वाली मकड़ियों के जींस को बकरियों में डालने की कोशिश की यह कोशिश इसलिए हुई कि अगर सिल्क बनाने वाला प्रोटीन बकरी के दूध में आ जाएगा तो वहां से उसे निकालना आसान होगा.  नेक्सिया (Nexia) नामक कंपनी ने वैज्ञानिकों का इसमें साथ दिया और प्रोटीन को जैविकस्टील का नाम भी दे  दिया गया.   सन 1993 से सन 2005 तक यह कोशिश चली. सन 2009  में वह कंपनी दिवाला हो गयी और फार्माटिन (Pharmatene) को बेच दी  गयी. हांलाकि उस विश्वविद्यालय में अभी भी करीब 30 मकडी के जीन युक्त बकरियां हैं. 

लेकिन हमें तो प्रकृति ने हार मानना सिखलाया नहीं वह भी उस वक्त जब बात इतने फायदे की हो. बहुत सारी छोटी छोटी कंपनी इस दिशा में काम कर रहीं हैं इस बार सिल्क बनाने वाले जीन को इश्चीरिशिया कोलाई (E. Coli) नामक बैक्टेरिया में डाला गया. इस बार कुछ हद तक कामयाबी का दावा कर रहे हैं हम. परन्तु इसके बाद भी हमारे लिए इन रेशों  का इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा क्योंकि ये रेशे पानी में घुलते नहीं हैं साथ ही ये  काफी पतले हैं. इस सिल्क के करीब 1, 500 रेशे मिलेंगे तो हमारे काम लायक धागा तैयार होगा. इस काम के लिए नए तरीके की मशीन की जरूरत पड़ेगी. 

जर्मनी की एक कंपनी ऐएम सिल्क (AMSilk) ने इश्चीरिशिया कोलाई (E. Coli) की मदद से बनाए गए प्रोटीन का इस्तेमाल शैम्पू और कास्मेटिक में करने का दावा किया है. जिस कास्मेटिक और शैम्पू में इब सिल्क का इस्तेमाल होता है वह अपने उपभोगताओं को एक अनूठी चमक और मुलायमियत प्रदान करता है.  शुरूआती दौर में इस कंपनी ने स्पाइडर सिल्क की चार किस्में तैयार कीं. ये चार किस्में यूरोपियन गार्डेन क्रॉस स्पाइडर के डीएनए क्रम की मदद से बनाए गए हैं.  कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अपने इस प्रयास को और आगे बढाने का प्रयास कर रहें हैं. इनका दावा है कि पहली बार किसी कंपनी ने स्पाइडर सिल्क जैसी मजबूती वाला संयोजक स्पाइडर सिल्क बनाया है. 

लेविस और उनके साथी इन रेशों की मदद से सुपर मैटेरियल बनाने का सपना देख रहे हैं. लेइमेर को पूरी उम्मीद है कि 2015 के अंत तक के अंत तक बाजार में ऐएम सिल्क (AMSilk) का इस्तेमाल चिकत्सा विज्ञान के साथ साथ एयर बैग, पैराशूट आदि के निर्माण में होगा.

Tuesday, 9 September 2014

चलो कहानी सुने



मौत और जवान
यह एक रूसी जवान की कहानी है, जो रिटायर होने के बाद , अपने गाँव में आकर रहा था. अकेला था इसलिए थोड़ा बहुत काम करता और आराम फरमाता रहता. एक रात जब  वह सो रहा था अपने सर के पास उसे एक काली सी छाया दिखाई दी, उसके बड़े बड़े दांत थे, बड़े बड़े नाखून, चेहरा किसी नकाब में छुपा रखा था पर था बड़ा डरावना. जवान ने डरते डरते पूछा भाई तुम हो कौन और यहाँ क्या कर रहे हो.उसने अपनी घरघराती, अस्पष्ट सी आवाज में कहा, “मैं मौत हूँ”, यहाँ मैं तुम्हें अपने साथ लेने आया हूँ.” सुनते ही जवान के होश उड़ गए, “ क्या, अभी तो मैं हट्टा-कठ्ठा हूँ, और जिन्दगी में मैने कुछ देखा भी नहीं है.अभी तक तो मैं बस सीमा पर था. ये क्या तरीका है.” डरते हुए जवान ने कहा. यह सुन मौत ने कहा. “कोई बात नहीं तुमको मैं दो दिन देता हूँ अपने काम पूरे कर लो.” अभी तुम्हारे पास दो दिन है. इतना कह कर मौत चली गयी.
बेचारा जवान तो परेशान हो गया.  अब उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. खाना पीना सब बेकार लगने लगा, बस दो दिन हैं. मैं क्या इच्छा पूरी करूं. उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. फिर अचानक उसके मन में कुछ आया वह मुस्कुराया और चादर खींच कर सो गया. 

दो दिन बाद फिर से मौत उसके सर के पास आ कर बैठ गयी. जवान ने कहा देखो तुमने मुझे अपना काम पूरा करने का मौक़ा दिया था, मैंने बहुत कोशिश की पर मेरा एक काम थोड़ा सा बाकी रह गया गया है, मुझे एक दिन की और मोहलत दे दो.” मौत ने थोड़ी देर तक सोच विचार किया कुछ गुणा-भाग किया और फिर उस जवान से कहा,” ठीक है ठीक है चलो मैं कल आता हूँ, और मैं ये तुम्हारे दरवाजे पर लिख कर जाता हूँ”. और फिर मौत ने जवान के दरवाजे पर बड़े बड़े अक्षर में लिखा, ” कल मैं तुम्हें ले कर जाऊँगा”. और जवान को कहा “देखो, कल शाम मैं तुम्हें ले जाऊँगा”. जवान ने कहा, “ठीक है.” मौत चली गयी और जवान खाना खा कर चादर तान कर सो गया. 

आज का दिन निकल गया. दूसरा दिन आया, फिर शाम आई. शाम आते ही मौत सवार हो गई सर पर. चलो अब तुम्हारा समय खत्म हुआ. जवान ने कहा, क्यों डराते हो, अपने वाडे से मत मुकारो.” मौत ने कहा,”मैं कहाँ मुकर रहीं हूँ, मैंने कहा था कल आऊँगी.” जवान ने कहा,” वही तो तुमने कहा था कल आयोगी, और आज आ गयी देखो तुमने ही लिखा है, कल आऊँगी” मौत को कुछ समझ में नहीं आया, हाँ सच में मैंने तो कल आने की बात कही थी,  फिर ये क्या हुआ. सोचते सोचते मौत वापस चली गयी. दूसरी शाम को फिर मौत आई, जवान ने फिर कहा, “फिर आ गई, अरे तुम्हें कल आना था” मौत परेशान हो गयी, हाँ ये तो कल ही लिखा है. वह फिर वापस गयी. तीसरे दिन जब मौत आई तो वह थोड़ी नाराज थी उसे भी तो जवाब देना पड़ता होगा. इस बार जवान के यह कहने पर वह वापस तो हो गई पर जाते जाते दरवाजे पर लिखा सन्देश मिटा दिया.
जवान समझ गया अब कुछ और सोचना पडेगा. वह तैयारी करने लगा. दूसरे शाम को जब मौत आयी तो उसने जवान को एक बोरे के अन्दर देख किसी को डांटते सूना. वह कह रहा था,” तुम ताकतवर नहीं हो मौत अधिक ताकतवार है.”  मौत ने कहा, ‘आज कोई चालाकी नहीं चलेगी, तुम्हें मेरे साथ चलना ही होगा.” जवान ने कहा मैंने कब मना किया है, पर इस बोरे के अन्दर जो बैठा वह कह रहा है “यह मुझे तुमसे बचा लेगा क्योंकि वह तुमसे अधिक ताकतवर है. मैं उसे समझा रहा हूँ पर वह बार बार कह रहा है, तुम बहुत डरपोक हो.” यह सुन मौत को आया गुस्सा. उसने चीख कर कहा,” कौन है वह, बाहर निकालो.” इस पर जवान ने कहा, “वह बाहर नहीं आयेगा, बार बार कह रहा ही तुम तो डर से अन्दर जाओगे नहीं.” मौत को आया गुस्सा और वह घुस गई बोरे के अन्दर. जैसे ही मौत गई अन्दर जवान से कास के बोरे का मुंह बाँध दिया और दौड़ता हुआ उसे समुद्र में फेक आया और घर आ कर बड़े मजे से सो गया. 

इधर बेचारी मौत समुद्र की लहरों में थापदे खाती रही, बहुत साल बाद अचानक बोरे का मुंह खुल गया. गिरते पड़ते मौत बाहर आई. गुस्से से कांप रही थी मौत. “सबसे पहले मुझे उस जवान को ढूँढना है,” यह सोच कर वाज जवान के घर की और चल पडी. काफी ढूँढने पर जवान मिल गया पर अब वह जवान कहाँ था, वह तो पोते-पोतियों के साथ खेल रहा था अच्छा खासा खेत था उसके पास, बड़ा सा ख़ूबसूरत सा घर भी बना रखा था. मौत को देखते ही जवान ने कहा, “ माफ़ करना, पर अब मैं तुम्हें तंग नहीं करूंगा. चलो तुम्हारे साथ चलता हूँ. जिन्दगी के सारे रेंग देख लिए मैंने”