Friday, 26 September 2014

मक्खी को मकड़े का आमंत्रण



मकडी और मक्खी की वार्ता

क्या आप मेरे पार्लर में आयेंगी? मकडी ने एक उड़ती हुई मक्खी से पूछा
मनमोहक अचम्भित करने वाला, चौंका वाली चीजों से भरा हुआ है यह छोटा सा आरामघर
आ जाओ ये मुलायम चमकदार सीढीयाँ पहुचायेंगी आपको उस तक

ओह नहीं, नहीं इतनी व्यग्रता के साथ मुझे ऐसा आमन्त्रण न दो
मैंने सुना है अजूबों से भरा है तेरा यह पार्लर,
वापस नहीं आ पाता वह जो पहुंच जाता है उस तक.

मुझे पता है इन ऊंचाईयों को छूते छूते थक गए होंगे तेरे पर
आ, आकर लेट ले मेरे इस मुलायम छोटे बिस्तर पर
सुन्दर से पर्दों से घेर कर फैलाए हैं मुलायम से चादर उस पर
आओ सो जाओ इस पर तुम छुप कर

नहीं नहीं ऐसा मत करना,  ऐसा है मेरे बड़ों का कहना
इस के पास जाने वाले उठ नहीं पाते कुछ भी कर


मेरी होविट की कविता के अनूदित  अंश  

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