Tuesday, 2 September 2014

मकडी का जाल




जाल बुनती जाए 

घर की दीवाल के कोने में एक मकडा बड़ी तन्मयता से अपना जाल तैयार कर रहा है. यह जाल/वेब कीड़े मकौड़े के पकड़ने के लिए तैयार करता है वह. ये कीड़े मकौड़े ही तो उसका भोजन है.  जाल को बनाने के लिए जो धागा वह इस्तेमाल करता है वह उसके स्त्राव से ही बनता है. और जाल में जो धागे होते हैं वे दो तरह के होते हैं चिपचिपे धागे और ऐसे धागे जो चिपकते नहीं हैं. अगर किसी मकड़े को जाल बनाते हुए देखो तो बहुत आश्चर्य होता है. बहुत प्लान कर जाल/वेब तैयार होता है. सबसे पहले एक कोने से दूसरे कोने तक एक सीधा धागा बांधा जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में हवा की सहायता चाहिए होती है. हवा उस धागे को दीवाल या किसी दूसरे छोर से चिपका देता है, इस तह एक पुल बन जाता है.  अब इस धागे के ऊपर दूसरा धागा लगा कर मकडी ने उसे और मजबूत कर देती है.  इसके बाद इस धागे के सहारे वह दूसरा ढीला धागा बांधता है, यह धागा Y की आकृति लेता है. यह वेब का पहली तीन त्रिज्या हैं, इसके बाद अन्य त्रिज्या को खीचने के लिए एक चौकोर ढांचा (फ्रेम) तैयार किया जाता है. एक बार जब सारी त्रिज्या तैयार हो गयीं तब मकडी इन त्रिज्या की सहायता से गोलाकार धागा/ धागे की सहायता से वृत्त बनाना शुरू करती है. इस तरह पहले न चिपकने वाले धागे से वृत्त (circle) बनते हैं फिर इन वृत्ताकार न चिपकने वाले धागे के बीच में चिपचिपा धागा बीन देती है. वेब में यह चिपचिपा धागा बांधने के साथ ढाँचे का धागा (जिसे मकडी ने सहारे के लिए बनाया था) को मकडी हटा देती है. इस तरह वेब तैयार हो गया, और मकडी इसके केंद्र में जहां का धागा चिपचिपा नहीं है पर बैठ जाती है. यही इसका घर भी होता है. वेब बनाने के बाद जब शिकार उसमें फसता है वेब जहां तहां टूट जाता है. मकडा इस टूटे वेब को खा कर जाती है और फिर नया वेब बनाने लगती है.

मकडी की इस तन्मयता, एकाग्रता और हिम्मत न छोड़ने की आदत को देख व्हूती आउल ने एक कहानी में स्काटलैंड के बहादुर और समझदार राजा राबर्ट द ब्रूस का हौसला बढाने वाले मकड़े की चर्चा की है. इस कहानी में जब राजा ब्रूस अंग्रेजो से छ: दफा लड़ने के बाद भी अपना राज्य हार कर जंगल की एक गुफा में छुपा था, उसने एक मकडे को जाल बनाने की प्रक्रिया में धागे को एक दीवाल से दूसरे दीवाल की तरफ फेंकने की कोशिश करते देखा. मकडी ने बार बार कोशिश की छ: बार उसे सफलता नहीं मिली मकडी ने सातवी बार भी कोशिश की और सफल हुई. फिर उसने बड़ी सावधानी से योजनाबध्ध तरीके से अपना वेव तैयार किया. इसे देख राजा को हौसला मिला, राजा ब्रूस ने हिम्मत की और योजनाबध्ध तरीके से अपने देश को वापस पाने की सातवीं बार कोशिश की और सफल रहे. ये घर को गंदा करने वाला जाला किसी को हौसला दे सकता है, है न थोड़ा ताज्जुब करने वाली बात. कुछ और चीजें हैं जो हमें चौंका सकती हैं. वेब में इस्तेमाल होने वाले ये धागे प्रोटीन के बने होते हैं, इनमें हर मकडी अपने बहुत सारे संसाधान इस्तेमाल करती  है, यानी बहुत सारी एनर्जी/ऊर्जा खर्च करती  है. इसके बावजूद यह उस वेव को इतना सजाती क्यूं है? यह वैज्ञानिक के लिए एक शोध का कारण बना. शोध से यह तय हुआ कि इतने पतले धागों से बनाया गया यह वेब टिकाऊ हो हवा के झोंके से टूटे न इसलिए एक मकडी इसे इतनी बारीकी से सजाती है. इसका रंग कुछ ऐसा होता है कि मकडी उसमें आराम से छुप सकता ताकि उसका शिकार उसे देख न पाए और फिर यह वेब इतना आकर्षक होता है कि शिकार अनजाने में इसके पास पहुंचता है और चिपचिपे धागे उसे कहीं जाने नहीं देते. हाँ वह वेब/जाल जरूर टूट जाता है. पर इस टूटे वेब को मकडी बेकार नहीं जाने देती वह उसे भी खा जाती है ताकि प्रोटीन वापस उसके शरीर में इकठ्ठा हो और वह दूसरा वेब तैयार करने तैयार हो जाते है. इस तरह रोज बड़ी मेहनत के साथ मकडी तैयार करती है यह वेब/जाल.









                                              


                                                             

                                               


                         

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