Thursday, 31 December 2015

जन्म भुट्टे का



भुट्टा का जन्म चिपेवा देश की कहानी
बहुत पहले की बात है विश्व के इस खूबसूरत प्रांत में एक व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था.  बहुत मुश्किल से वह अपने परिवार के लिए खाना और दूसरे सामान जुटाया करता था. परन्तु उसका मन काफी दयावान था. वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था. उसका बड़ा बेटा वुन्ज़ भी काफी दयावान और दूसरों का ख्याल रखने वाला था. किसी भी जरूरतमंद की मदद कर उसे खुशी मिलती थी. बहुत छोटी उम्र से ही लोंगों की मदद करना उसे खुशी देता था.
धीरे धीरे वह समय आ गया जब वुंज उस उम्र में पहुंच गया जब उसे अपने आने वाली जिन्दगी को एक दिशा देनी थी. अपने भविष्य की इस दिशा को निर्धारित करने के लिए एक दिशानिर्देशक की जरूरत होती है. अपने दिशानिर्देशक से मिलने के लिए वुंज की उम्र के बच्चे तपस्या करते थे. वुंज ने भी इस नियम का पालन किया. तपस्या करने के लिए उसे घर छोड़ना था. वुंज घर छोड़ कर बगल के जंगल में चला गया. जंगल में जाते समय उसने रास्ते में मिलने वाले पेड़, पौधों, फूलों को ध्यान से देखा. इस यात्रा में वह पौधों के बड़े होने फूल से फल बनने की प्रक्रिया से वाकिफ हो चुका था. प्रकृति के इन खूबसूरत नजारों से वाकिफ हो चुका था वुंज. इन पेड़ पौधों, फूल फलों को देख वुंज के मन में ख्याल आया , कितने खूबसूरत रचनाओं का निर्माण किया है प्रकृति ने. प्रकृति के पास सब कुछ है, फिर इसके पास कोई ऐसा उपाय तो होगा जिससे हम आसानी से अपने भोजन का इंतजाम कर सके. हमें मछ्ली, चिडिया या जानवरों की हत्या न करनी पड़े. मुझे उस तरीके की खोज करनी है.
वुन्ज़ ने जंगल में एक कुटिया बनाई. उस कुटिया में उसने अपनी तपस्या आरम्भ की.  एक दिन जब उसने आँख खोली उसके सामने सुनहरे –पीले चमकदार वस्त्र और अपने खुले सुनहरे बालों में सजा एक देवदूत नजर आया. देवदूत ने मुस्कुरा कर कहा मुझे प्रकृति ने तुम्हारे पास भेजा है. हमें पता है तुम खुद को बलवान या धनवान बनाने की इच्छा नहीं रखते बल्कि तुम्हारे अपनों के लिए कुछ करना चाहते हो. इसके लिए तुम्हें मुझसे द्वन्द करना पड़ेगा. जब तुम द्वन्द में मुझे पराजित कर दोगे तब मैं तुम्हारी मदद करूंगा. वुंज भूखे रहने के कारण कमजोर हो गया था फिर भी उसने द्वन्द करना स्वीकार कर लिया. पहले दिन के द्वन्द में वह जीत गया. देवदूत ने मुस्कुरा कर कहा मैं फिर आऊंगा. दूसरे और तीसरे दिन भी अपने कमजोर शरीर के बावजूद वुंज ने देवदूत को पछाड़ दिया. तीसरे दिन देवदूत ने मुस्कुरा कर कहा, कल हमारे बीच अंतिम  द्वन्द होगा. उसमें जब मैं हार जाऊं तुम मेरे वस्त्र और बाल ले लेना फिर इस जगह को साफ़ कर मेरे शरीर को यहाँ दफना देना. याद रखना यहाँ की मिट्टी गीली होनी चाहिए. फिर कुछ एक दिनों पर यहाँ आ कर यह पता कर लेना की मुझे फिर से जिन्दगी मिली या नहीं. हाँ बस बीच बीच में मेरे कब्र के ऊपर उगने वाले घास और बेकार पौधों को हटाते रहना. यह कह देवदूत चला गया. इतने में वुंज के पिता   आ गए उनहोंने वुंज को घर चलने कहा. मैं दो दिन बाद आपके साथ घर चलूँगा. वुंज ने मुस्कुरा कर पिता को विदा किया.
दूसरे दिन अपनी सारी शक्ति को जुटा कर वुंज ने देवदूत को हराया. इसके बाद उसने देवदूत के निर्देश का पालन कर उसके शरीर को दफना दिया. इतना काम करने के बाद अपने वह घर वापस चला गया.
हर तीसरे दिन उस जगह पर आ कर वुंज देवदूत के कब्र पर उगी घास और दूसरे पौधों को कब्र से हटाता था और कब्र की मिट्टी को गीला करता था. यह नियम कुछ दिनों तक चलता रहा. एक दिन अचानक उसकी नजर कब्र पर उग आये पौधे पर पडी. उस पौधे का तना हरी हरी पत्तियों से ढका था. इन पत्तियों के बीच से झाँक रहा था हरे , सुनहरे कपड़ों और रेशमी सुनहरे बालों और दूध से भरे दानों से सजी बालियाँ. इन बालियों को देख वुंज खुशी से उछल पड़ा, खुशी से उछलते हुए उसने अपने पिता को बुलाया, आओ मेरे दोस्त से मिलो. यह है भुट्टा अब हमें शिकार करने की जरूरत नहीं हम इन दूध भरे दानों से अपनी जरूरत पूरी कर सकते हैं. उसकी खुशी छलक रही थी.
पूरे परिवार ने अपने समुदाय के सदस्यों के साथ मिल कर भुट्टे के दानों का इस्तेमाल कर बड़े से भोज का आयोजन किया.