पिछले दो दिनों से दिल्ली विश्विद्यालय के मौरिस नगर में अवस्थित एम सी डी विद्यालय
के बच्चे कॉलनी की सडकों पर धरती “हमारी माता है, इसे स्वच्छ, स्वस्थ रखना हमारी
जिम्मेदारी है.” आदि जैसे नारे लगाते चक्कर काट रहे हैं. दो दिनों से सुबह सुबह विद्यालय
की प्रार्थना सभा में कोई न कोई शिक्षिका उन्हें बिजली बचाने, कक्षा और विद्यालय
को साफ़ रखने की नसीहतें देतीं नजर आतीं हैं. आज की प्रार्थना सभा इन बच्चों को; जो
या तो पैदल या बस या फिर साझा कैब से विद्यालय आते हैं को नसीहत दी गई कि हमें कार
आदि जैसे वाहन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बच्चे कॉलनी में यह नारा लगाते घूम
गए, “ कार छोडो सायकिल चलाओ”. यह नारा लगाते बच्चे आपस में ठिठोली करते भी नजर आ
रहे थे, शायद उन्हें भी बहुत अजीब सा लग रहा था यह नारा लगाना. हर साल अप्रैल के
महीने में इस विद्यालय के शिक्षिक/शिक्षिका/प्राचार्या जाग्रत होतीं हैं, 22
अप्रैल यानी ‘अर्थ डे’ साल में एक ही दिन आता है, इस दिन को चुना गया था धरती,
पर्यावरण और धरती की शांती को बनाए रखने की बात और कुछ प्रयास करने के लिए, फिर
विद्यालय भी बच्चों को इस दिशा में उनकी जिम्मेदारियों को इस दिन निभा डालते हैं.
विद्यालय ही नहीं बड़ी बड़ी संस्थाएं, विद्वान आदि भी इस दिन अपनी हर तरह की
जिम्मेदारियों की बात करते हैं, नियम भी बनाते हैं. इन वार्ताओं, बैठक आदि में हमें इन विपदाओं के
कारण और उनसे निजात पाने के तरीके आदि बताये जाते हैं. इन कार्यक्रम के खत्म होने
के बाद इन कार्यक्रम के भागीदार अपनी ऐ सी गाड़ियों में सवार हो अपने ऐ सी कमरे की
तरफ चल पड़ते हैं, अप्रैल का महीना काफी गर्म होता है. टी वी, अखबार, इन्टरनेट पर
असामयिक आने वाली बारिश तूफ़ान और दूसरी प्राकृतिक विपदा आदि की खबरे सुनते हैं और
फिर से चिंचित हो वार्ता में डूब जाते हैं.