Monday, 26 January 2015

बिल्लियाँ प्यारी या खतरनाक



सफ़ेद, काली, भूरी हर तरह की बिल्लियाँ हमारे गलियों चौबारों पर अक्सर नजर आतीं हैं. कुछ प्रेमी तो शेर की मौसी को अपने साथ रखना पसंद करते हैं. छोटी छोटी, मोटी मोटी, बड़ी, भूरी, धब्बेदार न जाने कितने तरह की बिल्लियाँ घर में घुसपैट करने की तैयारी में रहती हैं, दूध-दही, मछली से ख़ास लगाव दिखाने वाली इन बिल्लियों का साथ इतना गहरा है कि इनसे अनेक तरह की मान्यताएं जुड़ गयीं हैं. इन मान्यताओं पर अगर नजर डालें तो यह भी पता चलता है एक ही स्थिति या कारण की दो अलग अलग जगह पर बिलकुल अलग व्याख्या की गई है. ऐसा होने की पूरी संभावना है और होना भी चाहिए क्योंकि ये सारी मान्यताएं या विश्वास का कोई वैज्ञानिक आधार तो है नहीं. चलो देखते हैं क्या कहती हैं ये मान्यताएं.
 हमारे देश के साथ यूरोप और अमेरिका में भी यह माना जाता है कि अगर काली बिल्ली रास्ता काट गई तो बुरा संयोग है और यात्रा को कुछ देर के लिए स्थगित कर देनी चाहिए. (इस चक्कर में बहुतों ने दौड़ते भागते ट्रेन पकड़ी है या फिर छोड़ दी है). वहीं अंग्रेज लोग (इंग्लैण्ड) के साथ जापानी भी इसे अच्छा सगुन मानते हैं. हाँ इंग्लैण्ड में सफ़ेद बिल्ली का रास्ते से गुजरना बुरा माना जाता है.
कहते हैं किसी बिल्ली को किक करना (पैरों से मारना) पैरों में गठिया उत्पन्न कर सकता है. गठिया हो न हो बिल्ली ने अगर नाराज हो कर काट लिया तो लेने के देने पड सकते हैं.
जापान में घरों के दरवाजे पर बिल्लियों के पुतले या चित्र रखना अच्छा मानते हैं, उनके अनुसार यह घर में समृद्धी लाता है. जापान तो समृद्ध हो गया अब हमारे देश की सरकार को अधिकतर घरों के दरवाजे पर इस चिन्ह की स्थापना आवश्यक बना देनी चाहिए.
मछुवारों के बीच काली बिल्लियों की बहुत मांग है, उसकी चोरी भी होती रहती है. दरअसल मछुवारों की पत्नियां पतियों के काम पर (समुद्र में) जाने के बाद काली बिल्लियों को घर में रखती हैं, उनका मानना है कि जब तक ये बिल्लियाँ उनके साथ हैं, उनके पति हर विपदा से परे रहेंगे. वहीं नाविक बिल्लियों को खिला पिला कर संतुष्ट रखने में विशवास रखते हैं. कारण बिल्लियाँ अपनी पूंछ की सहायता से तूफ़ान ला सकतीं हैं इसलिए उन्हें शांत रखो.
गड़े हुए खजाने की खोज में निकलना है तो बिल्ली को साथ रखो. फ्रांस में किसान वर्ग का कहना है कि एक ख़ास अनुष्ठान के बाद बिल्लियाँ आपको गड़े खजाने तक पहुंचा देती है. उन्हें रास्ते पर छोडो जहां पहुँच वो पैर से जमीन खोदने लगें वहीं खजाना मिलेगा आ ऊ आ ऊ ----.
लेकिन अगर बिल्ली आपके दरवाजे पर पैर रगड़ रही है तो कोई उपदेशक (गुरु, महात्मा) आपके घर टपक सकते हैं. अब खुश होना या दुखी होना आपपर निर्भर है.
कुंवारी लड़की का पैर यदि किसी बिल्ली की पूंछ पर पडा एक साल तक उसे वर नहीं मिलेगा ऐसा फ्रेंच मान्यता कहती है.
लेकिन अगर तुमने बिल्ली की छींक सुनी है तो तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए यह शुभ है. ओजेन में इसे धन आने का प्रतीक मानते हैं (चलो इनकी नाक में तिनके डाल सुरसुरी करते हैं). बिल्लियाँ इच्छा भी पूरी करती हैं. पेनिसुआला में नव दम्पति खाली पालने में बिल्ली को डालते हैं इससे उनके बच्चे पाने की इच्छा जल्दी पूर्ण होती है. अगर एक आँख वाली बिल्ली नजर आ गी तो अंगूठे पर थूक कर उसे पानी हथेली के बीच में लगा लो और इच्छा करो; वत्स कामना पूरी होगी (चलो ढूंढें कानी बिल्ली). कभी कभी हमारी बेहतरी के लिए इन्हें जान भी गंवानी पड़ती थी. जी हाँ बिल्लियों को घरों की नीव में ज़िंदा दफनाया जाता था. क्योंकि यह माना जाता था कि ऐसा करने से घर में रहने वालों की उन्नति होगी (अब भला इन बिल्लियों की क्या गलती है).
इतना ही नहीं इन बेचारी बिल्लियों ख़ास कर काली बिल्लियों को जादूगरनियां भी माना जाता है. ऐसा कहते हैं जादूगरनियां नौ बार बिल्लियों का रूप ले सकती हैं. बच कर रहो. बिल्लियाँ नौ बार जन्म लेती हैं ऐसा मिस्त्र के लोंगों का मानना है. यहाँ बिल्ली को बुराईयों का प्रतीक नहीं मानते बल्कि उसे देवी का दर्जा दिया गया है. पुराने मिस्त्र में लोगों को अँधेरे से डर लगता था, जब उन्होंने बिल्लियों को अँधेरे में निर्भीक घूमते देखा उन्हने लगा यह हमें अँधेरे पर विजय पाने में सहायता करेंगीं, और बन गईं बिल्लियाँ देवी.  अँधेरे में बिल्लियों की चमकती आँखे भी बहुत से अंधविश्वास को जमन देतीं हैं. कहीं यह मानते हैं कि अगर कोई बिल्ली लगातार तुम्हें घूरे तो तुम्हारी मृत्यु हो सकती है, तो कहीं की मान्यता है कि ये चमकती आँखें तुम्हें वशीभूत भी कर सकती हैं.
ऐसा कहना है कि बड़े बड़े तीसमार खां इस छोटे से म्याऊँ म्याऊँ करने वाले जानवर से किनारा करते थे. जहां इन्गलैंड के हेनरी गिल बिल्ली पर नजर पड़ते ही बेहोश हो गए, वहीं एडोल्फ हिटलर बिल्ली को देखते ही कांपने लगते थे, निपोलियन भी महल में बिल्ली को पा कर सहायता के लिए चीख पड़े थे. हैं न ये बिल्लियाँ मजेदार . हाँ इन बिल्लियों से डरना या इन पर प्यार आना ठीक है पर इन मान्यातों को मानकर अपना या नुक्सान करना समझदारी नहीं.



Friday, 23 January 2015

हमारे आस पास



हमारे आस पास
एक, दो, तीन, चार, -----आठ, नौ, सौ, एक सौ एक, एक सौ दो--------एक सौ नौ, दो सौ, दो सौ एक , दो सौ दो -------दो सौ नौ तीन सौ....मैंने छ: सौ तक गिनती कर ली और तुम अभी तक पेपर पकडे बैठी हो. मेरी बर्थ के सामने वाले बर्थ पर बैठे हुए बच्चे ने अपनी माँ से कहा. तकरीबन सात-आठ साल का बच्चा अपने माँ पिता के साथ रायपुर स्टेशन से रेल की इस यात्रा में शामिल हुआ था. बच्चे को अम्बाला जाना था. अम्बाला आर्मी स्कूल के कक्षा 2 का विद्यार्थी है दीप. उससे बात करने में मेरी दिलचस्पी देख उसकी माँ (जो मुश्किल से 22-23 साकल की युवती नजर आ रही थी) ने मुझे दीप के रूटीन से अवगत कराया. सुबह छ: बजे उठ जाता है, ब्रश कर अभी नहाता नहीं है, ठंढ है न तैयार हो 7.30 तक स्कूल चला जाता है. 2 बजे छुट्टी होती है नहाते धोते, खाते पीते साधे तीन चार बजते हैं. चार बजे से छ: बजे तक ट्यूशन, फिर घर आ कर आधे घंटे आराम करता है. उसके बाद नास्ता कर मेरे साथ बैठता है. आठ बजे तक मेरे साथ पढ़ता है फिर मैं उसे टीवी आदि के लिए छोड़ती हूँ. खाना खा कर दस बजे तक सोता है. अभी ही तो ध्यान देने का समय है नहीं तो बाद में सम्हालना मुश्किल होगा. मेरे यह पूछने पर कि क्या कि कैम्पस में दूसरे बच्चों के साथ नहीं खेलता? जबाब मिला सिर्फ शनीवार-रविवार बाहर निकलता है. इसे बच्चों के साथ खेलना, किसी के घर जाना पसंद नहीं है. किसी function में भी नहीं जाता.  
दूसरी तरफ भी एक परिवार अपनी छोटी बच्ची की उत्सुकता जगाये रखने की कोशिश में नजर आ रहे थे. देखो देखो कितनी काऊ फिल्ड में ग्रेज कर रहीं हैं. काउंट करो वन, टू, थ्री-----. वो देखो फार्मर है, ब्लैक क्रो ट्री की टहनी पर बैठा है. कितने फूल रेड, यलो अरे ग्रीन ग्रीन; ताजी ताजी लीफ; कितने ऊंचें हैं ट्री, छोटे भी हैं. वो देखो खेत उसे फिल्ड कहते हैं. अरे अरे रीभर, वाटर में बुफल्लो भी है.
मैं अपने इस सफ़र के दौरान राजधानी एक्सप्रेस के ऐ सी 3 कूपे का आनंद ले रही थी, इसका मतलब है मैं हिन्दुस्तान के मध्यवर्गीय समुदाय के संसर्ग में थी.
एक मध्यवर्गीय समुदाय के माता-पिता अपने बच्चे का भविष्य सुनहरा बनाने का हर प्रयास करता है. इस प्रयास में उनकी दिनचर्या बहुत व्यस्त हो जाती है. सुबह उठ कर बच्चे को स्कूल छोड़ना, घर के काम करना, आफिस जाना, दोपहर में लौटते समय बच्चे को स्कूल से लाना; बच्चे को कोचिंग/ट्यूशन  में छोड़ना फिर आफिस और घर का निपटाना; बच्चे को कोचिंग/ट्यूशन से लाना और फिर रात में भी बच्चे के दिन भर की दिनचर्या का लेखा जोखा लेना, उनके साथ होमवर्क करना; उन्हें आने वाले चैलेन्ज के लिए तैयार करने के लिए हर वह प्रयास करना जो उनकी समझ से बच्चे को आगे रखने में सहायक होगा.