Friday, 23 January 2015

हमारे आस पास



हमारे आस पास
एक, दो, तीन, चार, -----आठ, नौ, सौ, एक सौ एक, एक सौ दो--------एक सौ नौ, दो सौ, दो सौ एक , दो सौ दो -------दो सौ नौ तीन सौ....मैंने छ: सौ तक गिनती कर ली और तुम अभी तक पेपर पकडे बैठी हो. मेरी बर्थ के सामने वाले बर्थ पर बैठे हुए बच्चे ने अपनी माँ से कहा. तकरीबन सात-आठ साल का बच्चा अपने माँ पिता के साथ रायपुर स्टेशन से रेल की इस यात्रा में शामिल हुआ था. बच्चे को अम्बाला जाना था. अम्बाला आर्मी स्कूल के कक्षा 2 का विद्यार्थी है दीप. उससे बात करने में मेरी दिलचस्पी देख उसकी माँ (जो मुश्किल से 22-23 साकल की युवती नजर आ रही थी) ने मुझे दीप के रूटीन से अवगत कराया. सुबह छ: बजे उठ जाता है, ब्रश कर अभी नहाता नहीं है, ठंढ है न तैयार हो 7.30 तक स्कूल चला जाता है. 2 बजे छुट्टी होती है नहाते धोते, खाते पीते साधे तीन चार बजते हैं. चार बजे से छ: बजे तक ट्यूशन, फिर घर आ कर आधे घंटे आराम करता है. उसके बाद नास्ता कर मेरे साथ बैठता है. आठ बजे तक मेरे साथ पढ़ता है फिर मैं उसे टीवी आदि के लिए छोड़ती हूँ. खाना खा कर दस बजे तक सोता है. अभी ही तो ध्यान देने का समय है नहीं तो बाद में सम्हालना मुश्किल होगा. मेरे यह पूछने पर कि क्या कि कैम्पस में दूसरे बच्चों के साथ नहीं खेलता? जबाब मिला सिर्फ शनीवार-रविवार बाहर निकलता है. इसे बच्चों के साथ खेलना, किसी के घर जाना पसंद नहीं है. किसी function में भी नहीं जाता.  
दूसरी तरफ भी एक परिवार अपनी छोटी बच्ची की उत्सुकता जगाये रखने की कोशिश में नजर आ रहे थे. देखो देखो कितनी काऊ फिल्ड में ग्रेज कर रहीं हैं. काउंट करो वन, टू, थ्री-----. वो देखो फार्मर है, ब्लैक क्रो ट्री की टहनी पर बैठा है. कितने फूल रेड, यलो अरे ग्रीन ग्रीन; ताजी ताजी लीफ; कितने ऊंचें हैं ट्री, छोटे भी हैं. वो देखो खेत उसे फिल्ड कहते हैं. अरे अरे रीभर, वाटर में बुफल्लो भी है.
मैं अपने इस सफ़र के दौरान राजधानी एक्सप्रेस के ऐ सी 3 कूपे का आनंद ले रही थी, इसका मतलब है मैं हिन्दुस्तान के मध्यवर्गीय समुदाय के संसर्ग में थी.
एक मध्यवर्गीय समुदाय के माता-पिता अपने बच्चे का भविष्य सुनहरा बनाने का हर प्रयास करता है. इस प्रयास में उनकी दिनचर्या बहुत व्यस्त हो जाती है. सुबह उठ कर बच्चे को स्कूल छोड़ना, घर के काम करना, आफिस जाना, दोपहर में लौटते समय बच्चे को स्कूल से लाना; बच्चे को कोचिंग/ट्यूशन  में छोड़ना फिर आफिस और घर का निपटाना; बच्चे को कोचिंग/ट्यूशन से लाना और फिर रात में भी बच्चे के दिन भर की दिनचर्या का लेखा जोखा लेना, उनके साथ होमवर्क करना; उन्हें आने वाले चैलेन्ज के लिए तैयार करने के लिए हर वह प्रयास करना जो उनकी समझ से बच्चे को आगे रखने में सहायक होगा.   

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