Friday, 5 September 2014

टीचर होने का प्यारा अहसास



टीचर और बच्चे एक प्यारा सम्बन्ध 

अभी अनुरूपम  का फोन आया, करीब एक साल हो गया उसे एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर के रूप में विजयवाड़ा के पास एक इंजीनियरिंग कालेज ज्वाइन किये. उसके कालेज में भी शिक्षक दिवस का आयोजन हुआ था. बतौर शिक्षक यह उसका दूसरा शिक्षक दिवस था. उसकी आवाज से खुशी छलक रही थी, बहुत उत्साह के साथ वह समारोह के बारे में बात कर रहा था. वाकई शिक्षकों के लिए ये यादगार पल होते हैं, जब उनके विद्यार्थी सिर्फ उनकी बात करते हैं, उन्हें एक विशेष स्थान देते हैं, वह सब देते हैं जो शिक्षकों को अपने होने का अहसास देता है. बड़ा ही खूबसूरत अहसास होता है यह और हम सब खुद को इस अहसास का हकदार मानते हैं.
आज का यह दिन शिक्षकों के इस खूबसूरत अहसास के साथ जीने का दिन है, शिक्षकों के लिए शायद उन सारे ख़ूबसूरत पलों को याद करने का दिन है जो उन्हें शिक्षक या शिक्षिका होने का अहसास देता है. मेरे लिए वह बहुत ही प्यारा पल होता है जब फेसबुक/फोन पर मेरा कोई स्टूडेंट मुझे इसलिए याद  करता है क्योंकि वह मुझे याद करना चाहता/चाहती है इसलिए नहीं कि यह एक विधान है वाकई इन बच्चों के साथ बतौर टीचर बिताए पल बहुत ही प्यारे होते हैं. यह अहसास मुझे फिर से हुआ था जब मुझे किलकारी बाल केंद्र के विभिन्न केंद्र पर जाने का मौक़ा मिला. ये सारे केंद्र बिहार के विभिन्न सरकारी विद्यालय में अवस्थित हैं. यहाँ फिर से ऐसे बच्चों के बीच जा कर जिनसे मेरा पहले का कोई सम्बन्ध नहीं था, बच्चों और शिक्षक के बीच के उस कोमल से सम्बन्ध का अहसास ताजा हो गया. कितनी छोटी छोटी बातों पर खुश होते हैं ये बच्चे उनकी बातें सुन लो, उन्हें यह अहसास दिला दो कि तुम उनके पास हो, उनकी दुनिया बहुत प्यारी दुनिया है और हम भी उस दुनिया का एक भाग हैं बस उनसे दोस्ती करना कठिन नहीं होता. और यह दोस्ती सबसे कीमती सम्बन्ध होता है एक टीचर के लिए. सहरसा के एक स्कूल में बात चीत के दौरान यह बात सामने आई कि मिड डे मील के बाद कुछ लडके स्कूल से भाग जाते हैं. बच्चों ने बताया स्कूल का गेट बाद हो जाता है इसलिए कम ही बच्चे भाग पाते हैं. विकास से पूछे जाने पर कि वह क्यों नहीं भागता उसने कहा,”मेरा क्लास दूसरी मंजिल पर है, खिड़की से कैसे भागूंगा.” बात सही थी पर सबसे अच्छी थी उसकी मासूमियत कितने आराम से उसने अपने मन की बात कह डाली. पर इस रिश्ते को हम कायम नहीं रख पाते. 

स्कूल और कालेज में दी जाने वाली शिक्षा के बल बूते पर हम अपनी स्थिति में कुछ सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं मेरा यह विश्वास बिहार के इन स्कूल को देखने के बाद जैसे खत्म सा हो गया है. संयोगवश इन 18 स्कूल में से कुछ को मैंने स्कूल के शुरूआती घंटों (लंच से पहले) में देखा और कुछ को बाद के घंटों (लंच के बाद) में. पढाई जैसी प्रक्रिया तो होती शायद ही नजर आई, तीन चार स्कूल में हो रही थी. जहां यह प्रक्रिया चल भी रही थी वहां बच्चे उस प्रक्रिया के भागीदार नजर नहीं आ रहे थे. टीचर का कक्षा में न होना, किसी भी टीचर को कक्षा से कभी भी बुला लिया जाना, यह सब बहुत ही आम और ध्यान न दी जाने वाली घटनाएं लगीं.  फिर बच्चे कक्षा में हैं या नहीं या स्कूल में चलने वाली गतिविधियाँ उनके लिए सहायक हैं या नहीं, उनकी जरूरतें क्या है इस तरफ किसका ध्यान जाता है. ऐसे में शिक्षक या शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के बीच के उस कोमल रिश्ते को कैसे और कहाँ ढूंढें हम. हाँ एक रिश्ता जरूर नजर आया जहां टीचर अपना काम (वह पानी लाना हो या पंखा झलना) पूरे रुआब के साथ करवा रहे थे, साथ ही उनके व्यवहार से यह साफ़ नजर आ रहा था कि शिक्षकों और बच्चों के बीच  बराबरी/दस्ती  का सम्बन्ध नहीं है. बच्चों का कहीं भी आना जाना (वह खेलने का मैदान हो प्राचार्य का कक्ष ) भी बे रोक टोक चल रहा था. टीचर हों या बच्चे उन्हें इस बात की चिंता नहीं थी कि उनकी हरकतों से सामने वाला कैसे प्रभावित हो रहा है. किसी भी तरह की भाषा का प्रयोग करने से भी वे हिचक नहीं रहे थे. मुझे हर विद्यालय के प्रधान से बात करनी थी, यह काम लगभग हर स्कूल में बहुत कठिन लगा मुझे. कारण कभी भी कोई भी टीचर या स्कूल का कोई कर्मचारी जोर जोर से बोलता हुआ प्रधान के कक्ष में आ जाते  थे  और बिना इसकी परवाह किये कि वहां कोई प्रक्रिया चल रही है कुछ कहना या करना शुरू कर देते थे. यह सब देख मुझे बस एक ख्याल आ रहा था कि इन स्कूल में क्या बच्चों की उपस्थिति की परवाह होती होगी (सिवाय उपस्थिति दर्ज करने के), स्कूल उनकी दुनिया का हिस्सा बन पाता होगा. पर इस व्यवस्था के अन्दर ही आरती, संतोष, धर्मेन्द्र  और चन्दन जैसे टीचर भी हैं जो बच्चों के साथ बैठ उनकी छोटी छोटी बात बाँटते हैं, उनके परिवार को जानते, उनकी उलझनों को पहचानते हैं यह सम्बन्ध शायद बाल केंद्र के कारण के कारण बना है, पर यह फिर से उस खूबसूरत अहसास को जगाता है जो कहीं खोता नजर आ रहा है.

1 comment:

  1. जमनी हकीकत बयान करनेवाला दस्तावेज

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