Thursday, 11 September 2014

सुपर मैटेरियल: स्पाइडर सिल्क



मकड़े का सिल्क:  एक करिश्मा

फिल्म  स्पाइडर मैन-2 के एक दृश्य में स्पाइडर मैन ने अपने स्पाइडर के सहारे लोंगो से भरी ट्रेन को गिरने से बचाता है. इसमें उसने आधे इंच से भी पतले 10 जोड़े स्पाइडर सिल्क के धागे का इस्तेमाल किया था.  स्पाइडर मैन की सारी ताकत उसके धागों की मजबूती और लचीलापन है. कितने मजबूत नजर आते हैं ये धागे. पर ऐसा मत सोचिये कि यह सिर्फ एक कल्पना है. अगर आप इस क्षेत्र में काम रहे में जीव विज्ञान और इंजीनीयरिंग से जुड़े वैज्ञानिक का मंतव्य जानेगें तो मुझे पूरा विशवास है आप भी संजीदा हो जायेंगे. उताह यूनिवर्सिटी के जीवविज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफ़ेसर रैंडी लेविस को यह दृश्य सत्यता के काफी करीब लगा. उन्होंने इस दृश्य में इस्तेमाल किये जाने वाले धोगों की मजबूती के साथ उन धागों की संख्या जानने की कोशिश की जो दीवाल से चिपके थे. इतना ही नहीं ट्रेन का उसके यात्री सहित भार और ट्रेन की गति पता करने की भी आवश्यकता महसूस किया. लेविस के अनुसार स्पाइडर मैन अपने धागों की सहायता से ट्रेन रोक सकता है. लेविस पिछले 25 साल से  स्पाइडर सिल्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जी हाँ अब जल्दी ही हम एक नए सुपर मैटेरियल (सुपर सामग्री) का इस्तेमाल करने वाले हैं. और यह सुपर मैटेरियल तैयार होगा मकडी के द्वारा तैयार किये गए धागों से . वही मकडी और वही धागे जिसे घर के किसी कोने में देखते ही हम झाडन उठा दौड़ पड़ते हैं उसे उस जगह से हटाने. वही धागा और जाल जो अगर आपके दीवाल पर नजर आयेगा तो आपको गन्दगी नजरअंदाज करने वाला और लापरवाह समझा जाएगा. जी हाँ यह धागा स्टील से पांच गुना मजबूत और कलवार से तीन गुना कडा होता है. इतना ही नहीं स्वभाव से प्रोटीन होने के बावजूद यह सड़ता गलता नहीं है साथ ही यह जीवाणुनाशक भी होता है. काफी लचीला और मजबूत होने के साथ इतने सारे गुण,  प्रकृति के इस वरदान का इस्तेमाल हम नहीं कर पायें ऐसा कैसे हो सकता इसलिए वैज्ञानिक इस धागे को बाजार में लाने की कोशिश में लग गए. इस  धागे से बनी रस्सियाँ, कपडे, यहाँ तक कि पतले पतले रेशे से बहुत तरह की चीजें तैयार कर सकते हैं. पहली चीजें जो ध्यान में आती हैं वह हैं, बुलेटप्रूफ पोशाक, पेराशूट, एयरबैग और केबुल. लेकिन वैज्ञानिक खुद की चाह को इसकी मजबूती और लचीलेपन तक सीमित रखना नहीं चाहते. उनकी चाहत में इस धागे की जीवाणुनाशक प्रवृति भी आकर्षित करती है. हमारा शरीर भी इस धागे को स्वीकार करता है, तो हमारी चाहत तो बढ़ेगी ही. घाव को भरने या सिलने के लिए, कृत्रिम टेंडन बनाने में और न जाने कहाँ कहाँ हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन हमारी चाहत यहीं तक सीमित नहीं रहती इस धागे की और ताम्बे की थर्मल चालकता लगभग एक सामान है. लेकिन इसका घनत्व ताम्बे के घनत्व से 7 गुना कम है. इसका मतलब हुआ कि यह एक ऐसा पदार्थ है जो बहुत कुशलता के साथ ताप का प्रबंधन (heat management) कर सकता है. एक में दस के गुण, इसे बाजार में लाने की सख्त जरूरत है.
पर इस अनूठे से इतने गुणों से सुस्जित कुदरत के करिश्मे को अपना बना पाना आसान नजर नहीं आ रहा. यह मकडी जैसे घरों में फ़टाफ़ट जाला लगा कर हमें परेशान करती है वैसे ही यह हमें इरादे में कामयाब न होने दे कर चिढा रही है.  एक तो यह एक बार में बहुत सारे धागे नहीं बनाती दूसरा जितना बनाती है मकसद पूरा होने के बाद उसे खा जाती है. सिल्क वर्म को तो हमने काबू में कर किया है, वह हमारी मर्जी पूरी कर देते हैं, पर इन मकड़ियों को पालना भी संभव नहीं हुआ. चलो कोई बात नहीं धागे का स्वभाव हमें पता है, यह एक प्रोटीन ही तो है, कुछ और कोशिश करते हैं. कोशिश नहीं बहुत सारी कोशिश हुई और हो रही इस मूल्यवान धागे को बनाने की, पर वहां भी मुंह की खाई हमने.  एक उदाहरण लेते हैं, वायोमिंग विश्वविद्यालय (wyoming university) के जीववैज्ञानिकों ने सिल्क बनाने वाली मकड़ियों के जींस को बकरियों में डालने की कोशिश की यह कोशिश इसलिए हुई कि अगर सिल्क बनाने वाला प्रोटीन बकरी के दूध में आ जाएगा तो वहां से उसे निकालना आसान होगा.  नेक्सिया (Nexia) नामक कंपनी ने वैज्ञानिकों का इसमें साथ दिया और प्रोटीन को जैविकस्टील का नाम भी दे  दिया गया.   सन 1993 से सन 2005 तक यह कोशिश चली. सन 2009  में वह कंपनी दिवाला हो गयी और फार्माटिन (Pharmatene) को बेच दी  गयी. हांलाकि उस विश्वविद्यालय में अभी भी करीब 30 मकडी के जीन युक्त बकरियां हैं. 

लेकिन हमें तो प्रकृति ने हार मानना सिखलाया नहीं वह भी उस वक्त जब बात इतने फायदे की हो. बहुत सारी छोटी छोटी कंपनी इस दिशा में काम कर रहीं हैं इस बार सिल्क बनाने वाले जीन को इश्चीरिशिया कोलाई (E. Coli) नामक बैक्टेरिया में डाला गया. इस बार कुछ हद तक कामयाबी का दावा कर रहे हैं हम. परन्तु इसके बाद भी हमारे लिए इन रेशों  का इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा क्योंकि ये रेशे पानी में घुलते नहीं हैं साथ ही ये  काफी पतले हैं. इस सिल्क के करीब 1, 500 रेशे मिलेंगे तो हमारे काम लायक धागा तैयार होगा. इस काम के लिए नए तरीके की मशीन की जरूरत पड़ेगी. 

जर्मनी की एक कंपनी ऐएम सिल्क (AMSilk) ने इश्चीरिशिया कोलाई (E. Coli) की मदद से बनाए गए प्रोटीन का इस्तेमाल शैम्पू और कास्मेटिक में करने का दावा किया है. जिस कास्मेटिक और शैम्पू में इब सिल्क का इस्तेमाल होता है वह अपने उपभोगताओं को एक अनूठी चमक और मुलायमियत प्रदान करता है.  शुरूआती दौर में इस कंपनी ने स्पाइडर सिल्क की चार किस्में तैयार कीं. ये चार किस्में यूरोपियन गार्डेन क्रॉस स्पाइडर के डीएनए क्रम की मदद से बनाए गए हैं.  कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अपने इस प्रयास को और आगे बढाने का प्रयास कर रहें हैं. इनका दावा है कि पहली बार किसी कंपनी ने स्पाइडर सिल्क जैसी मजबूती वाला संयोजक स्पाइडर सिल्क बनाया है. 

लेविस और उनके साथी इन रेशों की मदद से सुपर मैटेरियल बनाने का सपना देख रहे हैं. लेइमेर को पूरी उम्मीद है कि 2015 के अंत तक के अंत तक बाजार में ऐएम सिल्क (AMSilk) का इस्तेमाल चिकत्सा विज्ञान के साथ साथ एयर बैग, पैराशूट आदि के निर्माण में होगा.

No comments:

Post a Comment