Tuesday, 11 October 2016

जवा फूल की लालिमा



लाल जवा फूल
अपनी भाभी के बगीचे में बैंगनी जवा फूल को देख मेरे मन संदिग्ध हो गया. मेरा मन जो इस फूल की सांस्कृतिक इस्तेमाल से जुड़ा है इसे ज़वा फूल मानने तैयार नहीं हो रहा. आखिर माँ काली का प्रिय जवा फूल बैंगनी या सफ़ेद कैसे हो सकता है. नही हो सकता है न आप सब मुझसे सहमत होंगे मुझे पूरा विश्वास है. बचपन से अम्मी की पूजा में लाल जवा को शामिल होते देखा है. ससुराल गयी वहाँ भी बड़ी जिठानी/गोतनी की पूजा की थाल का अभिन्न सदस्य होता है लाल उड़हुल. इसका स्वरूप और रंग देवी को बहुत पसंद है यह सभी कहते हैं. एक दल का जवा हो या फिर अपना विस्तार करता दो या अधिक दल वाला या फिर खुद में सिमटता मिरचैया उडहुल उसका लाल रंग ही मन को लुभाता है. गुड़हल, उड्हुल या फिर जवा फूल की बात होने पर गाढे हरे  रंग की अंडाकार कटावदार किनारे वाली पत्तियों वाले छोटे पेड़ या झाड़ियों के बीच हमारी नजरें इन लाल फूल को ही तो खोजती हैं. इसकी लाली भी अद्भुत है. इसकी लाली मुझे कभी भी खतरे या बहते खून का प्रतीक नहीं लगती यह तो मुस्कुराते ओंठ और जिन्दगी से भरे गर्म खून की चमक है. 

अपने बच्चों को फूल की संरचना पढाने के लिए भी हाथ में हमेशा लाल जवा ही पकड़ा है जिसकी लाल पंखुड़ियां पौधे से ही नहीं एक दूसरे से अलग हो कर भी मुरझाई नजर नहीं आतीं. हाँ पूजा की जगह पर भी देखा है इस फूल की लालिमा इसे धूमिल नहीं होने देती, जैसे भगवान से कह रही हो देखो तुम्हारे भग्तों ने हमारे आसरे से तो हमें अलग कर दिया पर हमारी चमक का वो क्या करेंगे.
जीवविज्ञान की शिक्षिका होने के नाते भी शायद इस फूल यानी Hibiscus rosa-sinensis से मेरी गहरी प्रीति है. हाँलाकि सच कहूं तो फूलों के अंगों का साक्षात्कार कराने के लिए मुझे यह कभी उपयुक्त जान नहीं पडा लेकिन इसकी लाल पंखुड़ियां मुझे बहुत भाती थीं (मैंने कभी भी एक से अधिक फूल का इस्तेमाल नहीं किया है). गाढे हरे पांच बाह्य्दल के कवच में लिपटी अपने शंकू के ऊपरी हिस्से में जाकर खुद को पूरी तरह फैलाती लाल पंखुड़ियां तो जादू बिखेरती नजर आते ही हैं, लेकिन इन पंखुड़ियों के जादू को बढाते हैं इस शंकू के बीच में मौजूद  एक जगह इकठ्ठा पुंकेसर का गुच्छा और उसके झूमते लहराते नन्हे नन्हे परागकोष. इनकी माया को और बढाने में सहायक होते हैं उस कीप से निकलते पांच फवारे यानी स्टिग्मा. सच कहा भिन्डी और कपास के फूल भी बहुत कुछ इसकी ही तरह नजर आते हैं. आखिर भाई बंधू जो ठहरे मेरा मतलब तीनों Malvaceae परिवार के सदस्य हैं इसलिए समानता तो नजर आयेगी ही. लेकिन इन पौधों के पीले या सफ़ेद, बैंगनी फूल इस लाल जवा की बराबरी नहीं कर पाते. ठीक इसी तरह जवा के इस बैगनी, पीले या सफेद स्वरूप को लाल जवा के आस पास रखने की इच्छा ही नही हो रही. हाँलाकि जवा Hibiscus rosa-sinensis या चाइना रोज के नाम से जाना जाता है (अब यह मत पूछना कि क्या यह चीन से आया है. इसके चीन से connection के बारे में कोई जानकारी नहीं है, हाँ इतना पता है कि इसकी लालिमा से अभिभूत मलेशिया के निवासियों ने इसे अपना राष्ट्रीय फूल का दर्जा दे रखा है. ), जबकि दूसरे Hibiscus की दूसरी जाति के सदस्य हो सकते हैं. 

एक मजेदार बात फिलिपाईन्स में इसकी पंखुड़ियों और पत्तियों को पीस कर लाल रंग निकाल लिया जाता है. इस लाल रंग के बुलबुले बच्चों का प्रिय खेल होते हैं. पपीते की खोखली डंठल इनके पाइप बनते हैं जिन्हें इन लाल रस में डुबा डुबा  कर बुलबुला बनाना एक मजेदार खेल होता है. 

मेरा लाल जवा लाजवाब है खेल तो छोड़ दो क्या तुमने इसकी चाय पी है. यह कोई मजाक नहीं है, विश्व के अनेक देश के निवासी इस चाय का आनंद लेते हैं. कहीं गर्म चाय तो कहीं ठंढी चाय. सबसे मजेदार बात है हर देश में इसे अलग अलग नाम से जाना जाता है. पश्चिम अफ्रीका में यह बिस्सप (Bissap) तो मिश्र में कारकादे (Karkade) है. चाय तैयार होती है इन लाल पंखुड़ियों को पानी में तब तक उबाला जाता है जब तक कि इसका लाल रंग पानी का रंग न बदल दे. अब इस भूरे या लाल पानी में नीम्बू मिलाते हैं और फिर मिलता है एक खुशनुमा, दिलअजीज चमकता लाल रंग. अब इस लाल रंग के घोल में शक्कर, ठंढा पानी और बर्फ मिला कर कंबोडिया के निवासी ठंढे पेय के रूप में इसका आनद लेते हैं. कहते हैं कि यह चाय रक्त चाप को उच्च से निम्न कर सकते हैं. पर ऐसा माना जाता है, डॉक्टर नही कहते. इन लाल पंखुड़ियों से बने लेप अपनी लालिमा देने के साथ हमारी त्वचा को सूर्य की खतरनाक किरणों से भी बचा सकते हैं. खैर यह सब तो अभी भी शोध का विषय है इन लाल पंखुड़ियों को कागज़ पर रगड़ कागज़ को रंगीन बनाने के साथ कर अम्ल और क्षार की पहचान तो कर ही सकते हैं. यानी इस लालिमा के जादू का इस्तेमाल करना भले ही हमारी फिदरत हो लेकिन इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि हम उड्हुल, गुडहल, चाइना रोज और जवा फूल को इसकी लालिमा के साथ ही देख पाते हैं.  सुन्दर चमकती लालिमा के साथ जो सूर्य की सुबह और शाम के सूरज की लालिमा की बराबरी करती नजर आती है.   


  

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