Thursday, 26 February 2015

विषय की खूबसूरती



आज दांत में अमरुद का एक छोटा सा बीज फंस गया, पूरा मुंह परेशान हो उठा. जीभ बार बार उस बीज को निकालने की कोशिश कर रहा था, मुंह के अन्दर लार की बाढ़ आ रही थी. मैंने शिउली को पढाने की कोशिश कर रही थी पर लार के कारण आवाज गड़बड़ हो रही थी. बड़ी मुश्किल से जब उस बीज को मुंह से निकाल फेंका तो मुंह को चैन मिला. यह तो हमने अक्सर देखा है शरीर के साथ कुछ गडबड़ी होती अलग अलग तरीके से चेतावनी देता है और गडबड़ियों को दूर करने की पूरी कोशिश करता है. एक जीवविज्ञान शिक्षिका होने के नाते शारीरिक बनावट, जिन्दगी और उससे जुड़े हर पहलू की बारीकियों से हम रूबरू होते रहते हैं. बच्चों को समझाना है इसलिए इन बारीकियों के गहराई में उतरना मेरी जरूरत है. जितना हम इन बारीकियों के जितना करीब जाते हैं आश्चर्य और उत्सुकता के समुन्द्र में गोते लगाते है. मनुष्य के विभिन्न शारीरिक तत्र की बात हो या फूल की बनावट की सजावट या फिर केंचुए और मिट्टी की दोस्ती या फिर हवा में पंछियों या खुशबू की रवानगी हो सब कुछ इतने रहस्य के पर्दे खोलता है, हमारी उत्सुकता जगाता है साथ ही हमें अपने सामाजिक, भौतिक, रासायनिक और मानसिक समाज से जुडी हर अवधारणा को समझाने में मददगार साबित होता है. यह जगत यह विज्ञान हमेशा एक लय में बहता नजर आता है. इतना खूबसूरत विषय परन्तु पढ़ने वालों की संख्या बहुत तेजी से घट रही है. मुझे याद है जब मैंने स्कूल में इस विषय को पढ़ाना शुरू किया था, उस वक्त मेरी कक्षा में अच्छे खासे बच्चे थे तकरीबन 35 पर धीरे धीरे यह संख्या घटने लगी, मुझे खुद पर संदेह होने लगा. हांलाकि, जितने बच्चे इस विषय से जुड़े थे वो बहुत उत्सुक, संवेदनशील विषय के प्रति और कक्षा में होने वाली बातों से संतुष्ट नजर आते थे.  निचली कक्षा यानी नौंवी दसवीं में बहुत ही चाव और उत्सुकता के साथ जीव-विज्ञान की बातें करते नजर आने वाले बच्चे भी ग्यारहवीं में जब विषय चुनने की बात होती इससे किनारा करते नजर आते थे. मेरी चिंता बढ़ रही थी. मैंने दूसरे विद्यालय के शिक्षकों से भी बात की, पता चला वहां भी यही हाल है; चार-पांच ज्यादा से ज्यादा दस बच्चे जीवविज्ञान से जुड़ते दिखे. उन बच्चों से बात करने के बाद मेरा मन और दुखी हो गया क्योंकि उनके अनुसार उन्हें विज्ञान पढ़ना था परन्तु गणित नहीं मिला इसलिए जीव विज्ञान लेना पडा. हांलाकि यह तो हमेशा से होता था कि जीव विज्ञान को गणित से कम सम्मान दिया जाता था पर इस विषय के प्रति आकर्षण तो था.
इतना खूबसूरत विषय परंतु इसके चाहने वालों की संख्या घटती चली जा रही है, इसकी बारीकियों, इसके गुण से बच्चों को जोड़ने में हम नाकामयाब हो रहे हैं. अगर कोई बच्चा जीव विज्ञान अपनाता है तो एक ही सवाल होता है , डाक्टर बनना है? मेरे बेटे ने जीव विज्ञान को ही अपना विषय बनाया था, पर जब उसने गणित को नहीं कुबूला था मैं उसके भविष्य को ले कर आशंकित हो उठी थी. जीवविज्ञान के साथ वह कैसे आगे बढे इस तलाश में मैंने एक सहारा ढूंढा वह था, “बायोमेडिकल साइंस” इसमें मुझे इस विषय की वही आत्मा नजर आई, जिससे मैं जुडी हूँ, फिर मैंने यह भी महसूस किया यह इन खूबसूरत रहस्यों, संबंधों से जोड़ने में अधिक सहायक होगा. परन्तु मेरे बेटे को मेडिकल साइंस से जरिये शायद इस दुनिया से जुड़ना था इसलिए उसने वह रास्ता चुना. हाँ, इस अनुसंधान के दौरान मुझे जरूर लगता रहा, काश मैं अपने विद्यार्थी जीवन में इन विषय के बारे जानती तो शायद और पहले इसके खूबसूरत पहलुओं से जुड़ पाती.
खैर, मेरी यह खोज खाली नहीं गई, हमारे दोस्त की बेटी ने इस विषय से खुद को जोड़ा, मैंने उत्साहित हो कर इसके शोध रूपी सवभाव से परिचित कराया. अब उस बच्ची ने तीन साल पूरे कर लिए. अब समय आया है आगे का रास्ता तय करने का. एक बार फिर मैं आश्चर्य में पडी. तीन साल तक इस विषय के जुड़ने के बाद भी उसका चुनाव था ‘मैनेजेमेंट’. उसका कहना था अब जल्दी से मैं निश्चिन्त होना चाहती हूँ. उसके यह कहते ही मुझे उन अभिभावकों की बात याद आ गई जो जीव विज्ञान से अपने बच्चों को इसलिए नहीं जोड़ना चाहते क्योंकि एक तो इस विषय के साथ आगे बढ़ने का कोई ऐसा रास्ता नजर नहीं आता जिससे बच्चे जल्दी से निश्चिन्त हो जाएँ. बच्चों का कहना है जीव विज्ञान मतलब चिकित्सा विज्ञान और उसमें इतना पढ़ना पड़ता है. चिकित्सा विज्ञान से जुड़ने की इच्छा रखने वाले बच्चों में करीब 50% बच्चे अपने माता पिता के चिकित्सा विज्ञान से जुड़े रहने के कारण इससे जुड़ते हैं, कुछ लडकियां होने के कारण.
शिक्षा का एक उद्देश्य जीविका का साधन सुनिश्चित करना तो है ही, पर इसके साथ जीवन के हर पहलुओं, अपने चारो तरफ बिखरे रहस्य को समझना और उसे सुलझाने की कोशिश करना, संबंधों की समझ बनाना के साथ खुद को प्रश्न पूछने के लायक बनाना है. परन्तु हमारा शिक्षा तंत्र शायद यह काम ठीक से नहीं कर पा रहा है. हम विभिन्न विषयों की आत्मा से परिचित नहीं हो पा रहे, बस उसे एक औजार की तरह इस्तेमाल करते हैं.




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