Wednesday, 13 May 2015

सिप सिप

सिप-सिप सुड़क
इतने तरह की चिड़ियाँ, उनके विविध रूप के भोजन; अन्न के दाने, छोटे-छोटे बीज, मुलायम पत्तियाँ, तरह तरह के फल, मांस-मछली और न जाने क्या क्या. जितने तरह के भोजन उतने तरह की चोंच. हम जब आस पास देखते हैं तो यह सारी विभिन्नता स्पष्ट नजर आती है. ऐसे में ढूंढते है ऐसी चोंच को जो सिप करता है. है क्या ऐसी कोई चोंच है हमारे आस पास? अरे उस नन्हीं सी चिड़िया की लम्बी सी चोच जो बस फडफडाती ही रहती है. फडफडा फूलों के चारो तरफ मंडरा मंडरा कर अपनी लम्बी-ई-ई-ई चोंच को फूलों के अन्दर डाल कर चूस लेती है. अपनी लम्बी-लम्बी सूई जैसी चोंच वाली,  आगे-पीछे; ऊपर-नीचे उड़ने वाली हमारी हमिंग बर्ड फूलों में चोंच डाल कर चुप-चाप रस चूस लेती है. पर अनोखा है उनका फूलों से रस चुराने का यह तरीका.
हम जब भी इस नन्ही चमकीली चिड़िया को फूलों में चोंच डाले देखते हैं तो हम एक स्ट्रा की कल्पना करते हैं जो फूल के रस को ऊपर खींच रहा है. पर वहां ऐसा कुछ नहीं होता. इनकी पतली नुकीली चोंच रस चूसने का काम नहीं करतीं बल्कि ये अपने अन्दर इस चिड़िया की चोंच को छुपा कर रखती हैं. और यहीं चोंच चुराती हैं फूलों से शहद.
हमिंग बर्ड की यह लम्बी पतली जीभ अपने अगले हिस्से पर दो नन्हीं नालियां होती हैं, जिसपर छोटे छोटे बाल होते हैं. इस नन्हे पक्षी को जब फूलों से शहद चाहिए होता है यह अपनी जीभ फूलों से चिपका लेते हैं और इसके अगले हिस्से के दोनों हिस्से/गर्त (trough) फूलों के रस को चूस;  नहीं-नहीं सोंख लेते हैं. जी हाँ यहाँ रस चूसे नहीं जाते सोंख लिए जाते हैं ठीक उसी तरह जैसे हम सोख्ते से स्याही या दूसरे द्रव को सोंख लेते हैं. एक बार रस सोंखाने के बाद हमिंग बर्ड अपनी जीभ को खींच लेती है जिससे की रस चिड़िया के गले तक पहुंच जाते हैं और चिड़िया फिर से फूलों से रस सोंखने का काम शुरू कर देती है.
अपनी जीभ की लम्बाई के आधार पर यह अपनी जीभ को हर मिनट में 3 से 13 बार फूलों से रस लेने के लिए इस्तेमाल करते हैं. यह ऐसा सिर्फ इसलिए कर पाते हैं क्योंकि इनके पास एक अद्भुत रचना है जिसे हम हाइऔड (hyoid) कहते हैं. यह हाइऔड हड्डी, मांसपेशियों और कार्टीलेज का बना होता है. यह तंत्र इसकी जीभ का अभिन्न हिस्सा है. यह हाइऔड एपेरेटस चोंच के निचले हिस्से में पहुंच कर दो भाग में बंट जाता है.. इसके दोनों हिस्से फोरामेन मैग्नम (ऐसा बड़ा छेद जिससे होकर स्पानल कार्ड ब्रेन तक जाता है) के दोनों तरफ फ़ैल जाते हैं. फोरामेन मैग्नम के दोंनों तरफ से यह हाइऔड एपेरेटस पीठ से होकर स्कल (खोपड़ी) के ऊपरी भाग तक पहुंचता है, आँखों के बीच तक.
यह हाइऔड एपेरेटस सिर्फ हमिंग बर्ड और कठफोड़वा में होता है, ताकि ये आसानी से जीभ को फूलों और पेड़ों के तनों के अन्दर से रस लेने के लिए इस्तेमाल कर सकें.  

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