Saturday, 9 May 2015

मदर्स डे:



अनोखी माताएं
आक्टोपस माँ टेढ़े मेढे शरीर और गहरे समुद्र की निवासी आक्टोपस में माँ की ममता पाई जाती होती होगी यह कल्पना कर पाना हमारे लिए थोड़ा कठिन है.  इन माताओं पर किये गए शोध की सहायता से पता करने की कोशिश करते हैं कि इस भयानक से जंतु को प्रकृति ने इस खूबसूरत अहसास से नवाजा है? इन शोध के अनुसार आक्टोपस माताएं किसी चट्टान के पास यानी सूखी जगह पर आ कर अंडे देतीं हैं. उस समय के बाद से करीब 4 साल तक वह उस जगह से हिलती भी नहीं हैं. उन अण्डों को दुनिया की हर बुरी नजर से छुपाये हुए वह बस अण्डों की जरूरत को पूरा करती रहतीं हैं. अण्डों को आक्सीजन मिलता रहे इसलिए बीच बीच में वो उन्हें पानी से नहलाती रहती हैं. इसके अलावा उनमें कोई हरकत नजर नहीं आती. अपने बच्चों के प्रति वह इस हद तक समर्पित होती हैं कि इन चार साल तक  वह भोजन त्याग देतीं हैं. खाना उनके पास भी पहुंच जाए फिर भी वह उस पर नजर नहीं डालतीं. इस दौरान उनका एक ही लक्ष्य होता है अण्डों की पूरी तरह से देखभाल. अपनी इस जिम्मेवारी को पूरा करते ही वह इस दुनिया को अलविदा कह देतीं हैं. अब इससे बड़ी ममता की मिसाल और क्या हो सकती है.
चलिए अब एक दूसरी माँ की बात करते हैं यह है स्ट्राबेरी जहरीले डंक वाला मादा मेंढक (female strawberry poinson arrow frog). इस माता ने भी एक अनोखा तरीका अख्तियार किया है अपने बच्चों की देखभाल का. पानी स्त्रोत के पास अंडे देने के बाद यह माँ अण्डों से टेडपोल के बाहर आने का इंतज़ार करती हैं. इसके बाद प्रत्येक टेडपोल को एक एक कर अपनी पीठ पर सवार कर बगल के पेड़ पर करीब 100 फीट तक की ऊंचाई पर ले जाती है. वहां वह हर टेडपोल के लिए एक पत्ती को नाव जैसा स्वरूप देती है और उन पत्तियों में बगल के पानी के स्रोत से लाकर पानी भरती है. इस तरह हर टेडपोल के लिए रहने की जगह तैयार होती है. जब तक यह टेडपोल एक युवा मेंढक नहीं बन जाता वह उन्हें अपने असेचित अण्डों का भोजन कराती है. कितनी अनोखी हे न यह माँ.

हमारा जहरीला बच्छू माँ भी पीछे नहीं है बच्चों को जन्म दे कर वह खुद को आजाद नहीं कर सकती. छोटे छोटे बच्चे बिच्छू उसकी पीठ पर डेरा जमा लेते हैं. जब तक बच्चे बिच्छू बड़े नहीं हो जाते माता की पीठ पर जमे रहते हैं.

फीमेल सी लाउस (Female sea louse) की बात करते मन काँपता है. यहाँ बच्चे माँ के शरीर से बाहर आने के लिए माँ के पेट को अन्दर से चबा डालते हैं और माँ चुप चाप बैठी रह उस दर्द को बर्दास्त करती है.

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