गुलमोहर है हमारा नाम
मेरी तरफ यूं आँख फाड़ कर क्यों देख रहे हो. पहचानते नही हो क्या मुझे मैं
गुलमोहर हूँ. ओह! समझ गया तुम इस रास्ते से तो अक्सर गुजरते हो लेकिन तुमने मुझे
कभी नोटिस नही किया था. हाँ, झेपों नहीं कारण मैं जानता हूँ पूरे साल मैं अपने कड़े
बदन पर हरी पत्तियाँ धारण किये रहता हूँ. हालाँकि मेरी पत्तियाँ भी बहुत प्यारी
हैं, लेकिन वह मुझे उतना आकर्षक नहीं बनाती कि तुम्हारी नजरें टिक जाएँ. और अप्रैल
महीने का हमारा रूप तुम्हारी नजरों को हमसे आगे जाने नहीं देता है. हाँ, अप्रैल के
महीने में ही हमारे बदन पर मुस्कुराते हैं, हमारे फूल. बहुत कम दिनों का साथ होता
है इनका. अप्रैल के महीने के साथ आते हैं और इस महीने के तीस तीन हमारे जीवन के
सबसे खूबसूरत पल होते हैं. हमारा पूरा शरीर पूरे महीने यानी तीस दिन इन लाल नारंगी
फूलों से ढका रहता है. हमारी पत्तियाँ भी इन फूलों को मुस्कुराने की जगह देती हैं.
देख रहे हो न अभी पत्तियाँ कम हो गयी हैं. उनका कहना है पूरे साल हमारा आधिपत्य है
बस इस एक –दो महीने के लिए आये इन लाल-नारंगी फूलों जी भर कर दुनिया देखने दो. हाँ, अप्रैल के महीने में इनका आधिपत्य होता है.
हाँ अप्रैल तुम्हारे विद्यालय में नए सत्र के शुरू होने वाला महीना, इसी कारण शायद
इसे “month of pupil” भी कहते हैं.
वह मास जब ठंढ अपना चादर समेट विदा लेती नजर आती है. उस चादर को हटाती सूरज की किरणें गुनी गुनी
गर्माहट के लिए रास्ता खोलती नजर आती हैं. धरती की खूबसूरती खिल उठती है और आने
वाली गर्माहट का इन्तजार शुरू हो जाता है. कहते हैं “अप्रैल” शब्द का उद्गम लैटिन
aperire से हुआ है जिसका अर्थ है “To open यानी खुलना”. बस इसी महीने में हमारे यह
लाल-नारंगी फूल खुलते हैं. इस फूल का रंग अप्रैल महीने कई तरह हमें मौसम के बदलते
रंग से जोड़ता नजर आता है. इसके खूबसूरत लाल पंखुड़ियां (जो सूर्ख नहीं है) मई-जून
की लाल तीखी गर्मी का आभास देते हैं. अप्रैल के महीने की तरह सर्दी का सुकून और
गर्मी की गर्माहट दोनों का अहसास खुद में समेटे नजर आते हैं हमारे फूल.
अच्छा मेरे खुले फूलों को ध्यान से देखने कई चाहत रखते हो. यह हमारी टहनियों
पर गुच्छे में नजर आयेंगे तुम्हें सूरज को चुनौती देते हुए. देखो कैसी आसमान कई
तरफ नजर उठा मुस्कुरा रहे हैं, जैसे सूरज को कह रहे हैं, तुम्हारी तेजी हमें
कुम्हलाने में सफल नही होगी तुम्हारी तीखी नजर हमें भाती है, दोस्ती कर ली है हमने
तुम्हाती तेज नजरों से. अब सूरज का सामना करना है तो एक दूसरे का साथ देना होगा.
हमारी टहनियों पर इन फूलों के बड़े बड़े गुच्छे नजर आयेंगे तुम्हें. हर गुच्छे में डंठल पर मौजूद सारे फूल एक सतह पर आ कर खुलते
हैं, बिलकुल एक गोल घेरा बनाते हुए. तुम इन फूलों की इस सजावट को “कौरिम्ब” कहते
हो शायद. खैर! कुछ भी कहो वह तुम्हारा मसला है. मैं तो इतना जानता हूँ पांच
पंखुड़ियों वाला हमारा फूल बहुत अनोखा है. पांच पंखुड़ियां हैं, चम्मच जैसी नजर आती
हैं. इन पंखुड़ियों का निचला भाग पतला और लम्बा है और ऊपरी भाग फैला हुआ. इनका रंग
बहुत प्यारा है गाढा नारंगी या फिर लाल. इनका रंग ही ख़ास नहीं है बल्कि ख़ास है इन
पंखुड़ियों की अदा. पांच में चार तो एक जैसी हैं रंग रूप आकार सब कुछ एक जैसा लेकिन
पांचवीं पंखुड़ी को इन चार जैसा होना नहीं भाया. यह थोड़ी बड़ी है साथ ही इसका शरीर
नारंगी –सफ़ेद रंग कई धारियों से सजा हुआ है. अपने रंग रूप पर इसे बहुत मान है तभी
तो अलग से मुस्कुराता नजर आता है. आम तौर तुम्हे हमारे फूल लालिमा बिखेरते नजर आयेंगे
किन्तु हमारी इनकी पीली छटा भी कम मनमोहक नही है. हाँ हमारी कुछ किस्मों के पास
पीले और कुछ के पास सफ़ेद फूल भी होते हैं. लेकिन यह सब अप्रैल के राजा हैं. मैं
गर्व के साथ कह सकता हूँ अप्रैल को वीनस यानी सुन्दरता कई देवी का महीना है और
हमारे फूल इसके सबसे बड़े गवाह हैं. पूरी धरती को अपनी आभा से सुन्दर बनाने में
पीछे नहीं रहते हमारे लाल –नारंगी फूल.
अप्रैल का महीने को भी अलग अलग दर्जा दिया गया. पहले उसे कैलेण्डर में वर्ष के
दूसरे महीने का दर्जा दिया गया था वह भी सिर्फ 29 दिन के साथ. लेकिन फिर कैलेण्डर
में जनवरी के महीने को जोड़ा गया और यह वर्ष का चौथा महीना बना. फिर भला हो जुलियस सीजर का जिसने इस महीने के साथ न्याय
किया और इसे पूरे तीस दिन प्रदान किये, नही तो इसके एक दिन को चुरा ही लिया थी
दूसरे महीनों ने.
इन फूलों की लालिमा में जीसस के खून की चमक है, ऐसा केरल निवासी मानते हैं.
उनका कहना है जीसस को मेरे यानी गुलमोहर के पेड के बगल में ही सूली पर चढ़ाया गया
था, बस उनके खून के छीटों ने इन फूल एक अनोखी आभा प्रदान की है. तुम्हें तो पता ही
है अप्रैल ही जीसस के सूली पर चढाने का महीना है. हम ईस्टर का आयोजन इसी महीने में
करते हैं, हमारे फूलों के खिलने के महीने में.
जीसस के खून के छीटों से निखरा यह फूल हिन्दुओं के भगवान् कृष्ण को भी प्रिय
है सुनते हैं वह इन फूलों के गहने धारण करते थे. बंगाल प्रदेश के निवासियों ने इसे
कृष्णचूडा के नाम से पहचाना है. कभी कभी इसे राधा चूडा भी कहते हैं.
मेरी बातों से तुम्हे लग रहा होगा कि मेरी और तुम्हारी जान पहचान काफी पुरानी
है, लेकिन ऐसा कुछ नही है हमें तो तुमने हाल में ही पहचाना है. मटर परिवार के
सदस्य के रूप में, हाँ मटर परिवार ही मेरा परिवार है. मेरी फलियाँ बिलकुल मटर कई
फलियों जैसी होती हैं बस थोड़ी बड़ी होती हैं. यूं तो मैं मेडागासकर का निवासी माना
जाता हूँ, परन्तु हलके गर्म वातावरण मुझे पसंद हैं. देखो यहाँ यानी भारत में तुमने
अपने सड़कों के किनारे बड़े तादाद में लगा रखा है. अच्छी छाया मिलते है मेरी फ़ैली
हुई टहनियों और उनको ढकने वाली पत्तियों से. और फिर अप्रैल और मई के महीने में
मेरे खूबसूरत फूलों और पत्तियों का साथ पंख फैलाए मयूर से सजे पेड़ का भान भी तो
देता है.
हमारी इस खूबसूरती की तरह अप्रैल का महीना भी एक अनोखी चमक का मालिक है. चीन
के निवासी इस महीने को खेतों कई जुताई का महीना मानते हैं. ऐसी मान्यता है कि वहां
के बल्ड के सम्राट और राजकुमार ने इसी महीने में खेतों में जुताई की थी. धरती को
नई जान देता है अप्रैल का महीना, हाँ धीरे धीरे बढ़ती गर्मी आलस्य और उकताहट जरूर भरती
है. अप्रिल-मई की इस गर्माहट और उकताहट को थोड़ा नर्म और खुशमिजाज बनाने के लिए
शायद तुम मेरे बगल में मेरे दूसरे साथी अमलतास को रखते हो. उसकी डालियों से लटके
प्यारे , गोल पीले फूलों के झूमर और मेरे लाल-नारंगी फूलों के गुच्छे बहुत सुन्दर
समा बांधते हैं और सडक पर तुम्हारे सफर को आसान बना देते हैं.
यूं तो डेजी को अप्रैल का फूल माना गया है लेकिन मुझे विश्वास है हमारे फूलों
से बेहतर इस महीने को कोई सजा नहीं सकता. हीरा जो अप्रैल का पत्थर है की चमक और
मासूमियत हमारे फूलों का श्रृंगार जो ठहरा. तो अप्रैल महीने में धरती पर आने वाले
तुम्हारा स्वागत हमारे इन फूलों ने किया. तुम्हें सर्द की चादर खोल गर्मी की गुनगुनाहट
और तीखेपन का स्वागत करना सिखाया. आओ मेरे
इन अनोखे फूलों के साथ मिलकर मुस्कुराओ और बाँहें फैला आने वाले दिनों का स्वागत
करो.
सटीक एवम् मनोरंजक विवरण।
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