प्याज की कडवाहट
हमारी सब्जी की टोकरी में सजा प्याज हमेशा चर्चा में रहने के साथ अनेक कारणों
से हमारी आँखों से आंसू भी निकालता रहता है. रोटी या सत्तू के साथ कच्चा प्याज खा कर
अपना पेट और मन भरने वाला आर्थिक रूप से कमजोर तबका बाजार में इसकी बड़ी हुई कीमत
के कारण आंसू बहाता है. रसोई में बन रहे पकवान के स्वाद में चार चाँद लगाने के लिए
इस्तेमाल किये जाने वाले प्याज को काटते समय आँखों से आंसू निकलते हैं. तो कभी सलाद
में लिए गए कच्चे प्याज की गंध से आंसू बह जाते हैं. बेचारा प्याज अपने गुलाबी,
लाल आवरण में छुपा घर, होटल हर जगह की रसोई का अभिन्न अंग है, लेकिन उसे हम याद
करते हैं उसे काटते ही नाक तक पहुँचने वाले तेज गंध से या फिर आँखों से निकलते आंसू
से. बेचारा प्याज सबको पसंद आता है, सबकी रसोई का आवश्यक अंग है लेकिन इसे याद
करते हैं इसके बुरे गुणों के कारण. अपने इन गुणों का जिम्मेदार वह खुद नहीं होता
है. उसके इस गुण का जिम्मेदार है उसकी परवरिश और उसके जीन (genes).
प्याज की फसल की खेती अधिकतर ऐसे जमीन में होती है जहां सल्फर नाम का खनिज
पाया जाता है. अब पौधे तो मिट्टी से पानी और खनिज लेते ही हैं. प्याज भी मिट्टी से
पानी और खनिज लेता है उसे भी बढ़ना है. मिट्टी में मौजूद सल्फर प्याज की कोशिकाओं
में आकर इसके प्रोटीन का हिस्सा बन जाता है. यह तो जानी हुई बात है हमें जो मिलेगा
उसी वस्तु की मदद से ही हम इमारत तैयार करेंगे. प्याज के मामले में इस प्रक्रिया
को जरूरी भी माना जाता है. हमारे महारथी रसोईयों का कहना है सल्फर वाले प्रोटीन के
निर्माण से इसके ख़ास स्वाद की शुरूआत होती है. सही वातावरण में यह रसायन अपने ख़ास
अंदाज में हमें लुभाता है.
अपने ख़ास अंदाज का नुमाइस करने का मौक़ा इन्हें मिलता है जब इन्हें काटा जाता
है. इनके ऊपर चाकू, दांत या किसी और तीखी चीज का प्रहार होते ही इनकी कोशिकाएं फटती हैं. इन कोशिकाओं के फटते ही
सल्फर युक्त प्रोटीन और एंजाइम एलिनेज़ (allinase) का मिलन होता है. यह एलिनेज़ भी
कोशिकाओं के अन्दर छोटी छोटी थैलियाँ में मौजूद होता है. ये थैलियाँ चाकू लगने से
फटती हैं. इन दोनों का मिलन पैदा करता है वह तीखी गंध जिसके कारण प्याज को हम दूर
से पहचानते हैं. इस मिलन से पैदा हुई सल्फर युक्त गैस हमारे आँखों तक पहुँचती है
और हमारे नाक, आँख की नमी चुरा कर बहुत कमजोर सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करती है.
यह सल्फ्यूरिक अम्ल हमारी आँख और नाक में खुजली और पानी से भर देता है.
हमारा अनुभव कहता है की कुछ प्याज काफी तीखी गंध और आंसू देते हैं वहीं कुछ इस
मामले में कमजोर होते हैं. यह सब परवरिश का मामला है. अगर इन्हें ऐसी मिट्टी मिली
जिसमें सल्फर कम है तो यह आंसू भी कम देंगें, लेकिन अगर इन्हें भरपूर सल्फर प्रदान
किया तो आंसू बहाने तैयार रहिये. प्याज काटते समय आंसू पोछने की कोशिश मत कीजिएगा
क्योंकि आपके हाथ में भी प्याज का सल्फरयुक्त प्रोटीन कुण्डली जमा कर बैठ चुका है.
हाँ अगर आप प्याज को काटने के पहले अपने रेफ्रीजरेटर की ठंढक का आनंद लेने देंगे
तो वह आपको अधिक तंग नहीं करेगा. इसका कारण यह है की कम तापमान पर एंजाइम उतना
क्रियाशील नहीं रह पाता. तेज पानी के धार से धुला प्याज भी थोड़ा रहम करता है.
खैर हमने वैज्ञानिकों की बात मान ली कि सल्फर बना देता है प्याज को तीखा. पर इसके
तीखेपन और कड़वेपन की वजह इसका स्वार्थी स्वभाव है. हाँ यह मुझे तरबूजे से पता चला.
चलिए आपको भी बताती हूँ.
काफी पहले की बात है तरबूजा और प्याज पड़ोसी थे. एक ही खेत में साथ साथ रहा
करते थे. उन दिनों प्याज तरबूज जैसा बड़ा, मीठा और गोल मटोल था और तरबूज प्याज जैसा
छोटा और स्वाद रहित. प्याज जमीन के ऊपर भी पाया जाता था. प्याज चुपचाप पड़े पड़े बोर
हो रहा था. उसकी नजर बगल में उग रहे घास पर पडी. इस घास को अक्सर माली अपने खुरपी
की मदद से अलग कर देता था लेकिन वह ढीठ की तरह फिर उग आता था. प्याज को उसका मजा
लेने की सूझी. उसने पूछा तुम्हें माली बार बार दूर फेंक देता है फिर तुम वापस क्यों
आ जाते हो, यह हिम्मत तुममें आती कहाँ से
है. घास ने हंस कर कहा यह विपरीत परिस्थियां मुझे हौसला देती है. जितनी बार माली मुझे
अलग करता है उतनी बार मुझमें फिर से लहराने की हिम्मत आ जाती है, माली की यह
कार्यवाही मुझे हौसला देती है. अच्छा बहुत हिम्मत है तुममें. प्याज ने मुंह बनाया
हाँ हम बहुत आराम से जमीन से पानी लेकर फल फूल सकते हैं. मुझे अपने लिए कुछ
ख़ास नहीं चाहिए. थोड़ी सी जरूरत है मेरी जो बहुत खर्चीली नहीं है, इसलिए मैं आराम
से खुद को बार बार हर विपरीत परिस्थिति में भी खडा कर लेता हूँ.
घास की बात सुनते सुनते प्याज की नजर घास के बच्चों पर पडी जिसकी देख भाल घास
कर रही थी.
उन बच्चो को देख प्याज डर गया. यह तो हमारा सारा पानी, खाना चट कर जाएगा. इसे
हटाना होगा नहीं तो हम भूखे रह जायेंगे. उसने तरबूजे से कहा “हमें इस घास और उसके
बच्चों को हटाना होगा, खुरपी को आवाज दो.”
तरबूजे ने कहा, “अरे रहने दो. मिल बाँट कर रह लेंगे, क्यों परेशान हो रहे हो.”
प्याज ने उसकी बात नहीं सुनी उसने खुरपी को आवाज दे डाली. खुरपी ने घास को काट
डाला. कटती हुई घास ने दर्द के साथ कहा, प्याज तूने जैसा कडवा काम किया है तू कडवा
हो जाएगा. लोग तुझे तेरी अच्छाई से नहीं पहचानेंगे बल्कि तेरी कड़वाहट, बुरा स्वभाव
तेरी पहचान बनेगा. तुझे पानी चाहिए न आज से धरती के नीचे ही रहना. और तरबूज अपनी
अच्छी सोच के कारण तू मीठा, ठंढा और सुकून देने वाला बनेगा.”
उस दिन के बाद से प्याज छोटा और कडवा हो गया और साथ ही जमीन के नीचे धंस गया.
जबकि तरबूज मीठा, बड़ा और सुकून देने वाला फल बन इठलाने लगा.
यह तो थी कहानी. पर तय कर लो प्याज के कडवे होने का कौन सा कारण आपको भाता है प्याज को जमीन से मिले सल्फर की कडवाहट या फिर
घास की बददुआ.
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